Read More- रामबाबू जाटव
सूर्य देव कन्या राशि में रहते हुए पितृपक्ष में पूर्व जनों की मृत्यु तिथि पर तर्पण और श्राद्ध करने से पितृश्वर प्रसन्न होते हैं।
इसी भाव को लेकर के दिव्यपित्रेश्वराय नमः को बोलते हुए श्राद्ध किया,भावपूर्ण जल चढ़ाया। आपको बता दें श्राद्ध का पितरों से अटूट संबंध है।पितरों के बिना श्राद्ध की कल्पना नहीं की जा सकती है।श्राद्ध पितरों को आहार पहुंचने का आधार मात्र है। मृत व्यक्ति के लिए जो श्रद्धायुक्त होकर तर्पण पिंड दान आदि किया जाता उसे श्राद्ध कहा जाता है। उसमृत व्यक्ति के एक वर्ष तक के सभी और धर्म क्रिया कर्म संपन्न हो जाए उसी को पितृ की संज्ञा दी जाती है। अतः मृत्यु से पहले वर्ष तकमृतात्मा के नियम श्राद्ध करने का विधान नहीं है। यह श्रद्धा के बारे में पंडित राम प्रकाश दुबे ने जानकारी देते हुए बताया।
