धनखड़ के इस्तीफे के बाद क्या होगा?
धनखड़ के इस्तीफे के बाद उनका उत्तराधिकारी कौन बनेगा, यह सवाल राजनीति के गलियारों में गरम हो गया है। बिहार से JDU सांसद हरिवंश का नाम भी प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। हरिवंश, जो 2020 से राज्यसभा के उपसभापति पद पर आसीन हैं, भी इस पद के संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। हालांकि, उनके कार्यकाल का अंत भी इसी महीने हो रहा है।
यदि उपराष्ट्रपति का पद खाली होता है, तो राज्यसभा के उपसभापति को अस्थायी रूप से सभापति का कार्यभार सौंपा जाएगा। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि संविधान में कार्यवाहक उपराष्ट्रपति का प्रावधान नहीं है, इसलिए राज्यसभा का कार्यवाहक अध्यक्ष ही कार्यवाहक उपराष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा।
संसद सत्र के बीच इस्तीफा देने वाले पहले उपराष्ट्रपति
भारत के 14वें उपराष्ट्रपति, जगदीप धनखड़, ने 21 जुलाई की रात अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का कारण उन्होंने स्वास्थ्य समस्याओं को बताया। 74 साल के धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया।
धनखड़ ने संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के तहत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंपा। उन्होंने पत्र में कहा कि वे डॉक्टर की सलाह का पालन करते हुए तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहे हैं। इस्तीफा राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रभावी होगा।

इस इस्तीफे के बाद भारत की राजनीति में हलचल मच गई है। धनखड़ की स्थिति और उनके कार्यकाल के बारे में कई चर्चाएँ हो रही हैं, खासकर इस समय संसद का मानसून सत्र चल रहा है। वे ऐसे पहले उपराष्ट्रपति बने हैं जिन्होंने संसद सत्र के बीच इस्तीफा दिया है। इसके अलावा, वे तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने कार्यकाल के दौरान इस्तीफा दिया।
धनखड़ के पत्र में क्या लिखा?
धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में लिखा, “माननीय राष्ट्रपति जी, मैं अपनी सेहत को प्राथमिकता देने और डॉक्टर की सलाह का पालन करते हुए भारतीय उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं। आपके साथ मेरा कार्यकाल शांति और सहयोगपूर्ण रहा है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। साथ ही, प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल का भी धन्यवाद करता हूं जिनके सहयोग ने मेरे कार्यकाल को सरल और सकारात्मक बनाया।”
धनखड़ ने अपनी पूरी यात्रा को मूल्यवान और प्रेरणादायक बताया और कहा, “भारत की आर्थिक प्रगति और परिवर्तनशील युग में शामिल होने का अनुभव मेरे लिए सम्मान की बात रही।”
संविधान में उपराष्ट्रपति की भूमिका
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67(ए) में उपराष्ट्रपति के इस्तीफे की प्रक्रिया का वर्णन है। उपराष्ट्रपति का पद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वे राज्यसभा के सभापति होते हैं और संसद के कार्यों की निगरानी करते हैं। उपराष्ट्रपति का पद संभालने से पहले उन्हें शपथ ग्रहण करनी होती है।

धनखड़ के इस्तीफे ने देश की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है और आगामी चुनावों में राजनीतिक समीकरणों का प्रभाव पड़ सकता है।
नए उपराष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया
उपराष्ट्रपति का पद खाली होने पर नया उपराष्ट्रपति चुने जाने तक राज्यसभा के उपसभापति को अस्थायी रूप से कार्यभार सौंपा जाएगा। हालांकि, संविधान में उपराष्ट्रपति के पद के खाली होने पर किसी विशेष समय सीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। यह प्रक्रिया कब पूरी होगी, यह समय ही बताएगा।
