नई दिल्ली। वीर बाल दिवस के अवसर पर PM मोदी ने गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए उन्हें भारत की आत्मा साहस और शौर्य का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में भी साहिबजादों ने जिस दृढ़ता और आस्था के साथ अत्याचार का सामना किया. वह पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा है । प्रधानमंत्री साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की शहादत की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
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वीर बाल दिवस पर PM मोदी: ‘वे बहुत छोटे थे लेकिन उनका साहस विशाल था’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि साहिबजादे उस समय बहुत कम उम्र के थे, लेकिन मुगल सत्ता की क्रूरता ने उनकी मासूमियत को भी नहीं बख्शा उन्होंने कहा
औरंगजेब जानता था कि भारत को डराने के लिए भारतीयों के मनोबल को तोड़ना जरूरी है। इसी सोच के तहत साहिबजादों को निशाना बनाया गया। लेकिन वह यह भूल गया कि गुरु गोविंद सिंह जी और उनके साहिबजादे साधारण नहीं थे, वे त्याग और तपस्या की जीवंत मिसाल थे
सत्य बनाम अत्याचार की लड़ाई
प्रधानमंत्री ने कहा कि चारों साहिबजादों का संघर्ष केवल सत्ता के खिलाफ नहीं था, बल्कि यह सत्य और असत्य, धर्म और कट्टरता के बीच की लड़ाई थी उन्होंने कहा कि माता गुजरी जी गुरु गोविंद सिंह जी और साहिबजादों का साहस आज भी हर भारतीय को मानसिक और नैतिक शक्ति देता है।
सोशल मीडिया पर भी दी श्रद्धांजलि
वीर बाल दिवस की सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा
वीर बाल दिवस श्रद्धा का दिन है। यह दिन साहिबजादों के बलिदान, माता गुजरी जी की अडिग आस्था और गुरु गोविंद सिंह जी की अमर शिक्षाओं को स्मरण करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि साहिबजादों का जीवन आने वाली पीढ़ियों को साहस, सत्यनिष्ठा और दृढ़ विश्वास की राह दिखाता रहेगा.
अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने भी किया नमन
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साहिबजादों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में धर्म और राष्ट्र के लिए दिया गया उनका बलिदान इतिहास में अतुलनीय है उन्होंने कहा कि वीर बाल दिवस की शुरुआत का उद्देश्य इस गौरवगाथा को हर पीढ़ी तक पहुंचाना है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी साहिबजादों को नमन करते हुए कहा कि उनकी शहादत की अमर गाथा युगों तक देशभक्ति और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देती रहेगी ।
क्या है वीर बाल दिवस का महत्व?
वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन गुरु गोविंद सिंह जी के छोटे पुत्रों साहिबजादा बाबा जोरावर सिंह और साहिबजादा बाबा फतेह सिंह की शहादत को समर्पित है. प्रधानमंत्री मोदी ने 9 जनवरी 2022 को गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर इस दिवस की घोषणा की थी।
शहादत की ऐतिहासिक कथा
1705 में चमकौर युद्ध के दौरान साहिबजादों को उनकी दादी माता गुजरी के साथ हिरासत में लिया गया सरहिंद में उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया गया. लेकिन उन्होंने अपना विश्वास नहीं छोड़ा. अंततः उन्हें दीवार में जीवित चिनवा दिया गया. आज वही स्थान फतेहगढ़ साहिब के नाम से जाना जाता है, जहां हर वर्ष शहीदी जोड़ मेला आयोजित होता है।
