
Vasant Panchami:- वसंत पंचमी पर उज्जैन के सिंहपुरी स्थित सरस्वती माता मंदिर में स्टूडेंट्स की खासी भीड़ रही। सुबह से स्टूडेंट्स पेन, स्याही और किताब लेकर मंदिर पहुंचे। मान्यता है की आज के दिन सरस्वती माता मंदिर में पूजन कर स्याही, पेन चढ़ाने से बुद्धि का विकास होता है।
मां सरस्वती देती है विद्या का वरदान
Vasant Panchami:- सिंहपुरी में करीब 300 वर्ष पुराने बीजासन माता मंदिर के सामने सरस्वती माता का मंदिर है। यह विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर जहां पर वसंत पंचमी पर स्टूडेंट्स मां सरस्वती की मूर्ति पर स्याही अर्पित करते हैं। इसके साथ ही सरस्वती माता को पेन और पीले फूल भी चढ़ाए जाते हैं।वसंत पंचमी पर सुबह मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उनका स्याही से अभिषेक किया गया। परीक्षा में सफलता प्राप्ति के लिए देवी के समक्ष कलम, दवात,किताब-कॉपी, पेन रखकर पीले पुष्प अर्पित करते हुए पूजन-अर्चन किया गया।
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पीले फूल से खुश होती है मां सरस्वती
Vasant Panchami:- पंडित विजय त्रिवेदी ने बताया की 300 वर्ष पुराने मुगल कालीन इस मंदिर में काले पाषाण की मूर्ति है। स्टूडेंट्स जीवन में सफल होने की कामना लेकर स्याही चढ़ाते हैं। खासतौर पर यहां परीक्षा के दिनों में स्टूडेंट्स का तांता लगा रहता है। इस मंदिर में स्याही और कलम के साथ-साथ विद्यार्थी पीले फूल भी चढ़ाते हैं। जिसमें सरसों के फूलों का खास महत्व है। बसंत पंचमी पर्व पर मां सरस्वती की मूर्ति पर इतनी स्याही चढ़ती है कि मंदिर का पूरा फर्श नीले रंग का हो जाता है।
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