हमने प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए सशक्त भू-कानून लागू किए हैं। साथ ही, यह सुनिश्चित किया है कि इन नीतियों से प्रदेश में निवेश के अनुकूल वातावरण बना रहे और विकास की गति भी निरंतर बनी रहे। pic.twitter.com/VetfG5IT4C
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) June 18, 2025
सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का संकल्प
उत्तराखंड, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, लंबे समय से अपनी मूल पहचान को बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रहा है। बढ़ते पर्यटन और बाहरी निवेश के कारण स्थानीय संस्कृति और परंपराओं पर दबाव बढ़ा है। नए भू-कानूनों का उद्देश्य भूमि के अंधाधुंध उपयोग को नियंत्रित करना और यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय समुदायों का हित प्रभावित न हो। इन कानूनों के तहत भूमि खरीद-फरोख्त और उपयोग पर सख्त नियम लागू किए गए हैं, ताकि उत्तराखंड का सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्वरूप बरकरार रहे। मुख्यमंत्री ने इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य की विरासत को सुरक्षित रखेगा।
Uttarakhand Land Law: निवेश और विकास
सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ, सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि भू-कानून निवेश के रास्ते में बाधा न बनें। मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया कि इन नीतियों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाए रखें। उत्तराखंड में पर्यटन, ऊर्जा, और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश की अपार संभावनाएं हैं। नए कानूनों के तहत निवेश प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया गया है, ताकि आर्थिक विकास की गति बनी रहे। यह संतुलन उत्तराखंड को एक प्रगतिशील और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
