मलबे में दबे लोगों को रेस्क्यू किया, सड़कों पर पानी से जनजीवन बेहाल
प्राकृतिक आपदाओं का रौद्र रूप
uttarakhand himachal landslides 2025: बारिश के मौसम में हर साल एक अदृश्य डर रहता है, लेकिन इस बार यह डर कुछ ज्यादा ही सच्चा साबित हुआ। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में जो हालात बने हैं, वे किसी बुरे सपने से कम नहीं हैं। बारिश ने यहां के पहाड़ों को हिला कर रख दिया है, और नदियाँ, सड़कें, गांव – सब कुछ जैसे एक बड़े तूफान के बाद मलबे में दब गया है।
उत्तराखंड में मलबे से बची एक जान
18 सितंबर की रात, उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदनगर क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही मच गई। रात के अंधेरे में जब बारिश के पानी और मलबे ने लोगों को अपनी चपेट में लिया, तो किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि…. कोई बच पाएगा।
अद्भुत घटना करीब 16 घंटे बाद…..
लेकिन एक अद्भुत घटना हुई। करीब 16 घंटे बाद, मलबे के ढेर से एक शख्स को जिंदा बाहर निकाला गया। यह दृश्य ना केवल रेस्क्यू टीम के लिए, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी उम्मीद की एक किरण साबित हुआ।
मलबे से और भी लापता लोगों की तलाश जारी
यहां 35 से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, और 200 से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। मसूरी देहरादून रोड भी बाधित हो गया है, लेकिन राहत की बात यह है कि मसूरी में मौजूद 2000 के करीब पर्यटक सुरक्षित हैं। हालांकि, मलबे से और भी लापता लोगों की तलाश जारी है।
हिमाचल में किन्नौर और शिमला की मुश्किलें
उत्तराखंड के बाद हिमाचल प्रदेश भी भारी बारिश और लैंडस्लाइड के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। किन्नौर जिले के थाच गांव में बुधवार रात बादल फटने से सैलाब जैसे हालात बन गए।
तेज बहाव में दो गाड़ियां बह गईं,
गांव के लोग रातों रात सुरक्षित स्थानों पर भागे। शिमला के सर्कुलर रोड पर लैंडस्लाइड ने यातायात ठप कर दिया। एडवर्ड स्कूल के पास तो हालात ऐसे हो गए कि स्कूल की छुट्टियां भी घोषित करनी पड़ीं।

हिमाचल प्रदेश में नया रिकॉर्ड बनाया….
हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। बारिश की वजह से राज्य को लगभग 5000 करोड़ का नुकसान हुआ है, और अब तक 424 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
क्या इस कदर की तबाही से हम कुछ सिख सकते हैं?
क्या हम भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर तैयारी कर सकते हैं?
मध्य प्रदेश और बिहार में भी बारिश का कहर
इसी मानसून में मध्य प्रदेश और बिहार में भी भारी बारिश ने रुकावटें पैदा की हैं। मध्य प्रदेश में इस साल औसत से 187.96 मिमी ज्यादा बारिश हुई है,
जबकि,,,,
बिहार में 32 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूरे देश में एक अनहोनी सी सन्नाटा छाया हुआ है, क्योंकि मानसून के बाद अब बाढ़, लैंडस्लाइड और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
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