Uttarakhand cloudburst disaster: उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बीच प्राकृतिक आपदाओं ने राज्य को फिर से हिला दिया है। सितंबर 2025 के मध्य में दो दिनों के अंदर दो बड़े बादल फटने की घटनाओं ने जान-माल को खतरे में डाल दिया। 17 सितंबर की रात चमोली जिले के नंदानगर घाट में बादल फटने से कुंटरी लंगाफली वार्ड में छह घर मलबे में दब गए, जबकि 10 लोग लापता हैं। अब तक दो लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है। इससे पहले 16 सितंबर को देहरादून में बादल फटने से मसूरी मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके कारण 2500 पर्यटक फंसे हुए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इन घटनाओं पर त्वरित कदम उठाते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।

चमोली में तबाही
17 सितंबर की रात चमोली जिले के नंदानगर घाट इलाके में अचानक बादल फटने से भारी तबाही मच गई। कुंटरी लंगाफली वार्ड में भूस्खलन और मलबे के कारण छह घर पूरी तरह दब गए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कम से कम 10 लोग लापता हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। रेस्क्यू टीमों ने अब तक दो व्यक्तियों को सुरक्षित निकाल लिया है, लेकिन लगातार बारिश के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की रिपोर्ट में कहा गया है कि घटना स्थल पर NDRF और SDRF की टीमें तैनात हैं, लेकिन पहाड़ी इलाके होने से पहुंच मुश्किल हो रही है।
इस आपदा से प्रभावित क्षेत्र में सड़कें कट गई हैं और नदियां उफान पर हैं। अनुमानित नुकसान करोड़ों में है, जिसमें कृषि भूमि और बुनियादी ढांचे शामिल हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित निर्माण ने ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दिया है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “रात के अंधेरे में पानी और मलबा इतनी तेजी से आया कि भागने का मौका ही न मिला।” चमोली जिला प्रशासन ने लापता लोगों की सूची जारी कर दी है और परिवारों को सहायता का आश्वासन दिया है।

सीएम धामी की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित राज्य आपदा परिचालन केंद्र से पूरे प्रदेश में अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों की समीक्षा की। चमोली के नंदानगर क्षेत्र के प्रभावित गांवों में बचाव और राहत कार्यों को तेज करने के लिए उन्होंने अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिए। जनपद चमोली के जिलाधिकारी को गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को एम्स ऋषिकेश एयर लिफ्ट करने के आदेश जारी किए गए।

बैठक में सीएम ने स्पष्ट कहा कि अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों में सड़कें, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था और नेटवर्क कनेक्टिविटी को शीघ्र बहाल किया जाए। आपदा प्रभावित लोगों के लिए आश्रय स्थल, भोजन, स्वच्छ पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र में पर्याप्त चिकित्सक और दवाओं की उपलब्धता पर भी निर्देश दिए गए। धामी ने कहा, “हमारी प्राथमिकता प्रभावितों की जान बचाना और जीवन सामान्य बनाना है। केंद्र सरकार का पूरा सहयोग मिल रहा है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी सीएम से बात कर स्थिति की जानकारी ली और राहत कार्यों में सहायता का भरोसा दिया।
LIVE: देहरादून में आपदा प्रभावित क्षेत्र किमाड़ी और मसूरी रोड क्षेत्र का निरीक्षण करते हुए
https://t.co/jOLZ8bPnoS— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 18, 2025
Uttarakhand cloudburst disaster: पर्यटक फंसे, मौत का सिलसिला
इससे एक दिन पहले, 16 सितंबर को देहरादून में बादल फटने से फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की स्थिति बन गई। देहरादून से मसूरी का 35 किलोमीटर लंबा रास्ता कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे लगभग 2500 पर्यटक लगातार तीसरे दिन फंसे हुए हैं। तमसा नदी उफान पर आ गई, जिससे घर, दुकानें और वाहन बह गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में 13 से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 16 लापता हैं। 900 से अधिक लोगों को रेस्क्यू किया गया है। सहस्त्रधारा क्षेत्र में आईटी पार्क और आवासीय इलाके जलमग्न हो गए।
मुख्यमंत्री धामी ने किमाड़ी और मसूरी रोड क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लिया और प्रदेशवासियों की सुरक्षा एवं खुशहाली की कामना के साथ पूजा-अर्चना की। सीएम ने कहा, “यह राज्य के लिए बड़ा संकट है, लेकिन हम संकल्पित हैं कि हर प्रभावित तक सहायता पहुंचेगी।” निरीक्षण के दौरान उन्होंने राहत शिविरों का दौरा किया और प्रभावितों से बातचीत की। मौसम विभाग ने 18 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे और सतर्कता बरतने की जरूरत है।
आपदा प्रबंधन पर सवाल
ये लगातार घटनाएं उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती हैं। 2013 की केदारनाथ त्रासदी से लेकर हाल की घटनाओं तक, राज्य बार-बार ऐसी आपदाओं का शिकार हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियर पिघलना, वनों की कटाई और पर्यटन दबाव मुख्य कारण हैं। सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की है, लेकिन दीर्घकालिक उपाय जैसे बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली और सस्टेनेबल विकास पर फोकस जरूरी है।
PM मोदी का उत्तराखंड दौरा: आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण और राहत कार्यों की समीक्षा, जानिए कितनी हुई तबाही
PM Modi Uttarakhand visit: उत्तराखंड, हिमालय की गोद में बसा यह देवभूमि, हमेशा से अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन इस मानसून सीजन में भारी बारिश ने राज्य को प्रलयंकारी आपदा का सामना करने पर मजबूर कर दिया। अगस्त से सितंबर 2025 तक चली लगातार बारिश ने बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं को जन्म दिया, जिससे सैकड़ों जानें गईं, हजारों लोग बेघर हुए और अरबों रुपये का नुकसान हुआ। पूरी खबर…
