us vetoes gaza ceasefire proposal UNSC : 14 देशों ने जंग रोकने के लिए वोट किया
us vetoes gaza ceasefire proposal UNSC : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका ने गाजा में सीजफायर प्रस्ताव पर वीटो लगाया। 14 देशों ने जंग रोकने के लिए वोट किया, जबकि अमेरिका ने इजराइल के आत्मरक्षा अधिकार का हवाला दिया।
4 जून 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में गाजा में तत्काल, बिना शर्त और स्थायी युद्धविराम की मांग करने वाले प्रस्ताव पर मतदान हुआ। इस प्रस्ताव का समर्थन 15 में से 14 देशों ने किया, जबकि अमेरिका ने वीटो का प्रयोग करते हुए इसे अस्वीकार कर दिया।
🧩 अमेरिका का वीटो
अमेरिकी राजदूत डोरोथी शिया ने कहा कि यह प्रस्ताव सीजफायर के ‘कूटनीतिक प्रयासों’ को कमजोर करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेगा जो हमास की निंदा नहीं करता और हमास से हथियार छोड़ने और गाजा छोड़ने की मांग नहीं करता है।
🌍 अन्य देशों की प्रतिक्रियाएं
- चीन: चीन के राजदूत झांग जून ने कहा कि अमेरिकी वीटो ने गाजा की स्थिति को और भी खतरनाक बना दिया है और यह सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता को कमजोर करता है।
- रूस: रूस के राजदूत वासिली नेबेंज़िया ने अमेरिकी वीटो को सुरक्षा परिषद के इतिहास का एक और काला पन्ना बताया और आरोप लगाया कि अमेरिका इजराइल के ‘अमानवीय योजनाओं’ को पूरा करने के लिए समय खरीदने की कोशिश कर रहा है।
- फ्रांस: फ्रांस के राजदूत निकोलस डी रिविएरे ने कहा कि प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलने से गाजा की स्थिति और भी खराब हो सकती है।
- पाकिस्तान: पाकिस्तान ने अमेरिकी वीटो की आलोचना करते हुए कहा कि यह शांति प्रयासों को बाधित कर रहा है और मानवीय संकट को बढ़ा रहा है।
⚖️ वीटो पावर क्या है?
वीटो पावर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस) को दी गई विशेष शक्ति है। इसके तहत, ये देश सुरक्षा परिषद के किसी भी प्रस्ताव को, चाहे वह कितना भी अहम क्यों न हो, अस्वीकार (वीटो) कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर इनमें से कोई एक देश भी किसी प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करता है, तो वह प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता, भले ही बाकी सभी सदस्य इसके पक्ष में हों।
📉 गाजा में मानवीय संकट
गाजा में पिछले 19 महीनों से जारी संघर्ष के कारण 5 लाख से अधिक लोग भुखमरी से जूझ रहे हैं। इजराइली हमलों में 4 जून को कम से कम 95 फिलिस्तीनी मारे गए और 440 से अधिक घायल हुए। इसके अलावा, इजराइली सेना ने GHF केंद्रों को युद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया है, जिससे मानवीय सहायता वितरण में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं।
🗣️ अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
- ह्यूमन राइट्स वॉच: मानवाधिकार संगठन ने अमेरिकी वीटो की आलोचना करते हुए कहा कि यह गाजा में नागरिकों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है।
- क्यूबा: क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने कहा कि अमेरिकी वीटो इजराइल के अपराधों में भागीदार बनने जैसा है।
- पलस्तीन: पलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अमेरिकी वीटो को ‘आक्रामक और अमानवीय’ बताया और कहा कि यह इजराइल को और भी अत्याचार करने का हौसला देता है।
💡 सीख और सुझाव
- संयुक्त राष्ट्र की भूमिका: संयुक्त राष्ट्र को अपनी भूमिका को और सशक्त बनाना चाहिए ताकि वह वैश्विक शांति और सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
- कूटनीतिक प्रयास: देशों को कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देनी चाहिए और सैन्य विकल्पों से बचना चाहिए।
- मानवीय सहायता: संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए और इसे राजनीति से ऊपर रखना चाहिए।
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