Saudi F-35 Deal: क्राउन प्रिंस के दौरे में 48 जेट की डील संभव
Saudi F-35 Deal: अंतरराष्ट्रीय राजनीति फिर उबल रही है कारण है अमेरिका का सऊदी अरब को F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट बेचने का प्रस्ताव। यह वही विमान है जिसे पेंटागन अपनी सबसे उन्नत सैन्य उपलब्धियों में गिनता है। लेकिन अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियाँ इस सौदे से बेहद चिंतित हैं। उनका मानना है कि सऊदी-चीन की बढ़ती नजदीकियाँ इन स्टेल्थ तकनीकों को बीजिंग तक पहुँचा सकती हैं।
क्राउन प्रिंस सलमान के दौरे पर बन सकती है 48 F-35 की डील
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सात साल बाद अमेरिका जा रहे हैं। इसी दौरे के दौरान लगभग 48 F-35 जेट की डील पर मुहर लगने की चर्चा तेज है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कहा है सऊदी अमेरिका का मजबूत सहयोगी है और वह F-35 देने के पक्ष में हैं। लेकिन दूसरी ओर पेंटागन और इंटेलिजेंस एजेंसियाँ इसे अमेरिका की दीर्घकालिक राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक कदम बता रही हैं।
अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की ताज़ा रिपोर्ट
अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि सऊदी और चीन के बीच पहले से मौजूद सुरक्षा और रक्षा सहयोग इस डील को जोखिम भरा बना देता है। अगर सऊदी के बेड़े में F-35 शामिल होते हैं और वह चीन के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास या टेक्नॉलजी-साझेदारी जैसी गतिविधियाँ जारी रखता है, तो चीन को इन विमानों की रडार-एवॉयडेंस क्षमता, सेंसर नेटवर्क और ऑपरेटिंग सिस्टम का अध्ययन करने का मौका मिल सकता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि चीन वर्षों से अमेरिकी सैन्य तकनीक की जासूसी और रीवर्स-इंजीनियरिंग करता आया है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इस सौदे को अमेरिका की दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति के लिए बेहद खतरनाक मान रहे हैं।
F-35 सिर्फ इज़राइल के पास है
मध्य पूर्व में फिलहाल F-35 सिर्फ इज़राइल के पास है, और यह अमेरिकी नीति का हिस्सा भी रहा है कि इज़राइल तकनीकी रूप से क्षेत्र में सबसे आगे रहे। लेकिन अगर चीन को इस तकनीक का अप्रत्यक्ष एक्सेस मिल जाता है तो वह ऐसी क्षमताएँ विकसित कर सकता है जो इज़राइल की सैन्य बढ़त को चुनौती दे सकती हैं। अमेरिकी अधिकारियों को डर है कि यह सौदा न केवल चीन को सूक्ष्म सैन्य जानकारी हासिल करने में मदद करेगा, बल्कि एशिया और मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को भी बदल सकता है।
सबसे महंगा और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर
F-35 अमेरिकी सैन्य इतिहास का सबसे महंगा और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत स्टेल्थ फाइटर है। लॉकहीड मार्टिन द्वारा विकसित यह जेट 2006 से बनना शुरू हुआ और 2015 में अमेरिका की वायुसेना में शामिल हुआ। इसकी कीमत 700 करोड़ से 944 करोड़ रुपये तक जाती है और इसे उड़ाने में हर घंटे 31 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च आता है। ऐसे में अमेरिका यह सुनिश्चित नहीं करना चाहता कि इतनी महंगी और रणनीतिक तकनीक गलती से भी विरोधी देशों की पहुंच में आ जाए।
क्राउन प्रिंस सलमान का दौरा
कई वजहों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2018 में उनकी पिछली अमेरिका यात्रा के कुछ ही समय बाद पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव ला दिया था। पिछले सात सालों में वैश्विक राजनीति पूरी तरह बदल चुकी है। एक तरफ अमेरिका को गाज़ा युद्ध में इज़राइल का समर्थन करने के कारण अरब देशों की नाराजगी झेलनी पड़ी है, वहीं दूसरी तरफ चीन और सऊदी के रिश्ते लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने हाल ही में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया और 2023 में चीन ने सऊदी-ईरान समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। व्यापारिक मोर्चे पर भी चीन अब सऊदी का सबसे बड़ा साझेदार बन चुका है।
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