ट्रम्प Vs मेदवेदेव: ‘डेड हैंड’ बनाम ‘डेड इकोनॉमी’
2 अगस्त 2025 – अमेरिका और रूस के बीच खतरनाक कूटनीतिक तनाव नए शिखर पर पहुंच चुका है। डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की है कि अमेरिका रूस के पास दो न्यूक्लियर पनडुब्बियां तैनात करेगा। ये फैसला आया है रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव की उस धमकी के बाद जिसमें उन्होंने ‘डेड हैंड’ परमाणु सिस्टम की याद दिलाई थी।

ट्रम्प का ट्रुथ सोशल पोस्ट “बयानबाजी अब सीमा पार कर चुकी है”
“मेदवेदेव की उत्तेजक भाषा ने मुझे मजबूर किया कि मैं रूस के नजदीक दो परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने का आदेश दूं।
शब्दों के गंभीर परिणाम होते हैं – उम्मीद है यह सिर्फ शब्दों तक सीमित रहेगा।”
ट्रम्प ने सीधे तौर पर परमाणु युद्ध की संभावना का जिक्र नहीं किया, लेकिन इशारा साफ था “अमेरिका तैयार है।”
“हम ईरान या इजराइल नहीं हैं, डेड हैंड है हमारे पास”
मेदवेदेव ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“हर नया अल्टीमेटम युद्ध की धमकी है। ट्रम्प को ‘डेड हैंड’ की ताकत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अमेरिका अगर हमारे नेताओं को मारता है, तो जवाब खुद सिस्टम देगा।”
क्या है ‘डेड हैंड’ सिस्टम?
- 1980 के दशक में USSR द्वारा बनाया गया ऑटोमेटिक परमाणु प्रतिशोध प्रणाली
- जिसे ‘Perimeter’ भी कहते हैं
- यदि रूसी कमांड स्ट्रक्चर तबाह हो जाता है, तब यह सिस्टम अपने आप मिसाइलें लॉन्च करता है
- यह मानव हस्तक्षेप के बिना भी अमेरिका जैसे दुश्मन पर परमाणु हमला कर सकता है
यह सिस्टम आज भी ‘स्टैंडबाय मोड’ में माना जाता है क्या इसका मतलब युद्ध है?
परमाणु तनाव की ओर बढ़ता दुनिया का सबसे खतरनाक टकराव?
यह सिर्फ सैन्य शक्ति प्रदर्शन (Show of Force) है, लेकिन बहुत संवेदनशील समय पर मेदवेदेव के बयान और ट्रम्प की प्रतिक्रिया दोनों में कूटनीति की कमी है रूस पहले ही यूक्रेन में युद्ध में उलझा हुआ है, और अमेरिका में ट्रम्प की वापसी के बाद उसका रुख और आक्रामक हो गया है

कहीं ये जंग बयानबाजी से आगे न बढ़ जाए
विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बयानबाजी 1980s के शीत युद्ध युग जैसी है। ट्रम्प का यह कदम प्रेशर टैक्टिक है, लेकिन बेहद खतरनाक। नाटो और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे।
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