कल से 50% टैरिफ! अमेरिका का भारत की जेब पर हमला

कल सुबह जब भारत में लोग अपने-अपने काम पर जाने की तैयारी कर रहे होंगे, अमेरिका में एक झटका लागू हो चुका होगा—50% तक का टैरिफ भारत के एक्सपोर्ट पर। सिर्फ एक दस्तावेज़ से कितनी ज़िंदगियाँ बदल सकती हैं, इसका अंदाज़ा लगाना आसान नहीं है। लेकिन इसका असर सिर्फ व्यापारिक आंकड़ों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि आम आदमी की रसोई से लेकर युवा की नौकरी तक सब कुछ प्रभावित होगा।
ज्वेलरी से लेकर टेक्सटाइल तक- कौन होगा सबसे ज्यादा प्रभावित?
भारत हर साल 48 अरब डॉलर से ज़्यादा का सामान अमेरिका को निर्यात करता है। ये केवल कंटेनर में बंद पैकेज नहीं होते—हर पैकेट के पीछे होती है एक फैक्ट्री वर्कर की मेहनत, एक कारीगर की रोटी, और एक परिवार की उम्मीद।
ज्वेलरी इंडस्ट्री: जहां एक अंगूठी बनाने में कई घंटे लगते हैं, वहां अब अमेरिका से ऑर्डर मिलने में संकोच होगा।
कपड़ा और टेक्सटाइल: जिन बुनकरों ने हाथ से कढ़ाई की हो, वे अब बेरोजगारी की कगार पर खड़े होंगे।
सीफूड इंडस्ट्री: केरल और बंगाल के कई तटीय गांवों में अब जाल से कम मछलियाँ नहीं, कम ऑर्डर निकलेंगे।
हमने अभी लोन लिया था नया मशीन लगाने के लिए, अब तो ऑर्डर ही नहीं आ रहे…
– प्रवीण, टेक्सटाइल फैक्ट्री मालिक, सूरत
नौकरियां जाएंगी, युवा होंगे परेशान
CNBC की रिपोर्ट बताती है कि भारत से अमेरिका को जो चीजें एक्सपोर्ट होती हैं, उनमें सबसे बड़ी मात्रा में वही सेक्टर हैं जहां मैन्युफैक्चरिंग और कारीगरी ज़्यादा होती है। यानी – वही सेक्टर जहां हज़ारों मजदूर, युवा और महिला श्रमिक काम करते हैं।
अगर ऑर्डर घटे तो प्रोडक्शन घटेगा , प्रोडक्शन घटा तो छंटनी होगी छंटनी हुई तो हज़ारों लोगों की नौकरी जाएगी
मेरे पापा ज्वेलरी फैक्ट्री में काम करते हैं… कल से 3 दिन की छुट्टी दी है। लेकिन सब कह रहे हैं कि ऑर्डर ही नहीं आए।
– रीमा, 11वीं की छात्रा, मुंबई
भारत की इकोनॉमी को कितना नुकसान?
अमेरिकी टैरिफ से भारत की अर्थव्यवस्था को तीन सीधे झटके लग सकते हैं:
- निर्यात घटेगा – जिससे सरकार को विदेशी मुद्रा और टैक्स की कमाई कम होगी
- GDP पर असर – विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की GDP ग्रोथ 0.6% तक घट सकती है
- सरकारी नीति पर दबाव – सरकार को व्यापार नीति में बदलाव करना पड़ेगा और नई रणनीति बनानी होगी
क्या भारत को अब अमेरिका से हटकर नए बाजार खोजने होंगे?
सरकार पहले ही 50 देशों के लिए नई एक्सपोर्ट रणनीति पर काम शुरू कर चुकी है। अब भारत का फोकस है:
- सीफूड के लिए – रूस, यूरोप और कोरिया
- ज्वेलरी के लिए – वियतनाम, मलेशिया और थाईलैंड
- टेक्सटाइल के लिए – मिडल ईस्ट, अफ्रीका
साथ ही भारत ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स पर काम कर रहा है, ताकि अमेरिकी बाजार की निर्भरता कम हो सके।
रूसी तेल बना विवाद की जड़?

ट्रंप ने साफ कहा है—भारत रूस से जितना तेल खरीदेगा, उतना अमेरिका से रिश्ता खराब होगा। भारत अभी रोज़ाना करीब 18 लाख बैरल रूसी तेल खरीद रहा है। और इसी वजह से, ट्रंप ने टैरिफ को ‘पेनल्टी’ की तरह लागू किया है।
हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा देखें या अमेरिकी व्यापार संतुलन?
– वाणिज्य मंत्रालय का एक अधिकारी (नाम न छापने की शर्त पर)
अब सवाल ये है: क्या भारत झुकेगा?
ट्रंप की नीति है जैसे को तैसा। भारत की नीति है – सबका साथ, सबका व्यापार भारत ने अब तक अमेरिकी मांगों जैसे GMO फूड और डेयरी सेक्टर में एंट्री देने पर सहमति नहीं दी है। यही वजह है कि ट्रेड डील टलती जा रही है। अगर सरकार दबाव में आकर फैसले लेती है, तो देश के किसान और छोटे उद्योग सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे। अगर सरकार टैरिफ का सामना करती है, तो आने वाले कुछ महीनों तक निर्यात और रोजगार संकट गहराता रहेगा।
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