
टैरिफ की बंदूक टली… लेकिन किस ओर निशाना है?
सियासत में कभी-कभी शब्दों की गर्मी बंदूक से ज्यादा तेज़ होती है। डोनाल्ड ट्रम्प फिर से वही पुराना खेल खेल रहे हैं धमकी दो, रुको, दोस्ती जताओ… और फिर से धमकी दो। चीन पर 245% टैरिफ लगाने की बात चल रही थी। जवाब में चीन ने पहले ही 125% टैरिफ थोप दिए थे। दुनिया सांस रोके देख रही थी कि क्या एक और ट्रेड वॉर शुरू होने जा रहा है? लेकिन ठीक उसी दिन ट्रम्प ने एक सिग्नेचर किया और 90 दिन का ब्रेक दे दिया। यानी अब 9 नवंबर तक कोई नई दरें लागू नहीं होंगी।
मेरा जिनपिंग से रिश्ता अच्छा है ट्रम्प
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि चीन पर टैरिफ कब लगेंगे, ट्रम्प मुस्कराए और बोले
देखते हैं क्या होता है। वे ठीक काम कर रहे हैं। मेरा और जिनपिंग का रिश्ता काफी अच्छा है।
ये बयान जितना नरम था, उतना ही उलझा हुआ भी। क्योंकि ठीक एक महीने पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर चीन ने अपनी नीति नहीं बदली तो 245% टैरिफ लगेगा। तो सवाल है क्या ट्रम्प सचमुच चीन के साथ दोस्ती चाहते हैं या ये सिर्फ चुनाव से पहले की रणनीति है?
टैरिफ से कौन हारा और कौन हारेगा?
अब तक अमेरिका ने चीन पर 30% टैरिफ लागू कर रखा है। चीन ने अमेरिका के सामान पर 125% टैरिफ थोप दिया है। इससे फायदा
कम ही दिखा है। नुकसान बहुतों को हुआ है। Apple जैसी कंपनियों को चीन में प्रोडक्शन महंगा पड़ा अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी माना कि ज्यादा टैरिफ उल्टा असर कर सकता है
चीन की GDP पर 1% तक गिरावट का अनुमान है और अमेरिका? वह भी महंगाई और कंज्यूमर संकट से लड़ रहा है ट्रम्प के वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि टैरिफ बढ़ाने से अमेरिका खुद भी झुलस सकता है।
भारत और रूस भी बने निशाना
चीन अकेला नहीं है। अभी कुछ दिन पहले ही ट्रम्प ने भारत पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया वजह? रूस से तेल खरीदना। भारत की प्रतिक्रिया कड़ी थी
हमारा तेल आयात हमारे 1.4 अरब लोगों की जरूरतों पर आधारित है, न कि किसी की धमकी पर।
और रूस? ट्रम्प ने साफ कहा
अगर रूस 50 दिन में यूक्रेन से शांति नहीं करता, तो 100% टैरिफ लगेगा।
मतलब अब टैरिफ हथियार बन चुका है। और इससे न दोस्त बचे हैं, न दुश्मन।
ये ट्रेड वार है या चुनावी दांव?
2025 है। अमेरिका फिर से चुनाव के मुहाने पर है। ट्रम्प फिर से फॉर्म में हैं और उन्हें पता है कि आउटर एजेंट यानी चीन, भारत, रूस पर दबाव बनाना, घरेलू समर्थन लाता है। लेकिन हर बार ये खेल उल्टा भी पड़ सकता है। ज्यादा टैरिफ, ज्यादा महंगाई, ज्यादा बेरोज़गारी।
क्या ट्रम्प को फर्क पड़ेगा? शायद नहीं। उनकी रणनीति सीधी है:
डराओ, दवाब बनाओ, डील करो और फिर से दोहराओ।
अब आगे क्या?
90 दिन की मोहलत मिली है चीन को। पर ये कोई स्थायी समाधान नहीं है। ये तो मानो आग में पानी के छींटे हैं। नवंबर के बाद टैरिफ बढ़ेंगे या नहीं? भारत क्या जवाब देगा? चीन कितने दिन चुप रहेगा? ये सब अभी धुंध में छिपा है।
Read More:- पाकिस्तान की नई साजिश: गैस, पानी बंद कर भारतीय डिप्लोमैट्स पर दबाव
Watch Now :- #madhyapradesh 4 सालों में हुए 58 हजार से ज्यादा बच्चे गायब!
