
यूरिया खाद की कमी
सतना जिले की सहकारी समितियों में यूरिया की आपूर्ति बेहद सीमित है। कई समितियों में तो ताले लटके हुए हैं, और जो खुली हैं, वहां किसानों को लंबी कतारों में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ समितियों में यूरिया की एक-दो बोरी ही उपलब्ध हो पाती है, जो बड़े किसानों को मिल जाती है, जबकि छोटे और मझोले किसान खाली हाथ रह जाते हैं। इस कमी के चलते किसानों को प्राइवेट दुकानों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जहां कालाबाजारी चरम पर है। किसानों का आरोप है कि यह संकट जानबूझकर पैदा किया जा रहा है ताकि प्राइवेट दुकानदारों को लाभ पहुंचाया जा सके।
प्राइवेट दुकानदारों की मनमानी
किसानों का कहना है कि प्राइवेट दुकानदार यूरिया की किल्लत का फायदा उठाकर किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं। कई दुकानों पर यूरिया की बिक्री के साथ जिंक या अन्य दवाएं खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है, जिससे किसानों की लागत और बढ़ रही है। एक किसान ने बताया कि उसे एक बोरी यूरिया के लिए 350 रुपये देने पड़े, और साथ में अनचाही दवा भी खरीदनी पड़ी। इस तरह की मनमानी के खिलाफ किसानों में भारी आक्रोश है, और वे इसे प्रशासन की नाकामी मान रहे हैं।

Urea shortage Satna: धरना-प्रदर्शन की चेतावनी
सतना जिले के किसानों का गुस्सा अब सड़कों पर उतरने की कगार पर है। जिला महामंत्री और प्रदेश सचिव एडवोकेट मुख्तार अहमद सिद्दीकी (बच्चा भाई) ने चेतावनी दी है कि यदि शासन जल्द यूरिया की रैक उपलब्ध नहीं कराता, तो किसान धरना-प्रदर्शन और तालाबंदी जैसे कदम उठाएंगे। उन्होंने वर्तमान सरकार पर भ्रष्टाचार और अपराध को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर साल की तरह इस साल भी किसानों को खाद के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि सहकारी समितियों में पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए ताकि किसानों को राहत मिल सके।
प्रशासन की नाकामी
Urea shortage Satna: किसानों का कहना है कि सरकार और प्रशासन की उदासीनता के कारण यह संकट हर साल दोहराया जाता है। जिला कृषि विभाग के दावों के बावजूद गोदाम खाली हैं, और प्राइवेट दुकानदारों पर कोई अंकुश नहीं है। किसानों ने मांग की है कि सरकार यूरिया की आपूर्ति बढ़ाए और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करे। यदि समय पर खाद नहीं मिली, तो फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान होगा।
मोहम्मद असलम खान की रिपोर्ट
