uparashtrapati jagdeep dhankhar lucknow visit : लखनऊ, 1 मई 2025 : उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को लखनऊ में एक प्रेरक और विचारोत्तेजक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की आत्मकथा ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। धनखड़ ने अपने संबोधन में चुनौतियों का सामना करने, लोकतंत्र की ताकत और तकनीक के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
uparashtrapati jagdeep dhankhar lucknow visit : लखनऊ में गर्मजोशी से स्वागत
उपराष्ट्रपति का लखनऊ आगमन बक्शी का तालाब स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर हुआ, जहां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वे जानकीपुरम में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) पहुंचे, जहां पुस्तक विमोचन समारोह आयोजित हुआ।
क्या आप जानते हैं? आनंदीबेन पटेल की पुस्तक ‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ उनके जीवन की प्रेरक यात्रा को दर्शाती है, जो गुजरात के एक छोटे से गांव से शुरू होकर देश के बड़े मंचों तक पहुंची।
पुस्तक विमोचन: एक प्रेरक कहानी
उपराष्ट्रपति ने आनंदीबेन पटेल की आत्मकथा की तारीफ करते हुए कहा, “राज्यपाल ने मजदूरों के लिए जीवन भर काम किया। इस पुस्तक का विमोचन मजदूर दिवस पर करना उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।” उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि आनंदीबेन ने उनसे कहा कि किताब मुफ्त में नहीं मिलेगी, जिस पर धनखड़ ने हंसते हुए जवाब दिया, “मुझे कुछ भी मुफ्त लेने की आदत नहीं है!”
उन्होंने यह भी बताया कि आनंदीबेन ने पुस्तक विमोचन के लिए एकेटीयू को इसलिए चुना क्योंकि यह तकनीक और नवाचार का केंद्र है। “आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीक का उपयोग दुनिया भर में बढ़ रहा है। यह स्थान इस युग की जरूरतों को दर्शाता है,” धनखड़ ने कहा।
चुनौतियों का सामना: धनखड़ का प्रेरक संदेश
उपराष्ट्रपति ने अपने भाषण में चुनौतियों को गले लगाने की बात कही…
“चुनौती से भागना कायरता है। पहलगाम की हालिया घटना ने हमें चुनौती दी है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम एकजुट हैं।” उन्होंने राष्ट्रवाद को भारत की पहचान बताया और कहा कि पूरी दुनिया आज भारत की ओर देख रही है।
धनखड़ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ की। “बिना टैक्स बढ़ाए उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 30 लाख करोड़ तक ले जाना और प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना एक आश्चर्यजनक उपलब्धि है।” उन्होंने इसे अर्थशास्त्रियों के लिए शोध का विषय बताया।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
उपराष्ट्रपति ने लोकतंत्र में सहयोग और एकजुटता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने वक्फ कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा, “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में वाद-विवाद का स्थान होना चाहिए, वरना यह अराजकता में बदल सकती है।” उन्होंने न्यायपालिका का सम्मान करते हुए कहा कि कानून बनाना संसद का काम है, जबकि फैसले लेना न्यायपालिका का।
आनंदीबेन पटेल: शून्य से शिखर तक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आनंदीबेन पटेल की पुस्तक को एक ग्रंथ की संज्ञा दी। “इसके 14 अध्याय समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों की तरह हैं।” उन्होंने कहा कि चुनौतियां जीवन का सार हैं। आनंदीबेन ने गुजरात के एक छोटे से गांव से शुरूआत की और शिक्षिका, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री और अब राज्यपाल के रूप में अपनी छाप छोड़ी।
योगी ने कहा, “सात दशक पहले एक बेटी का स्कूल जाना कल्पना थी। आनंदीबेन ने माता-पिता के सहयोग और अपनी मेहनत से इसे हकीकत में बदला।” उनकी यह यात्रा हर किसी के लिए प्रेरणा है।
क्यों पढ़ें यह पुस्तक?
‘चुनौतियां मुझे पसंद हैं’ सिर्फ एक आत्मकथा नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है जो बताती है कि मेहनत और हिम्मत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह पुस्तक युवाओं, महिलाओं और समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणादायक है।
खास बात: उपराष्ट्रपति ने गीता और रामायण का जिक्र करते हुए कहा, “कर्म करते जाओ, फल की इच्छा मत करो।” यह संदेश आज के युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का लखनऊ दौरा न केवल एक पुस्तक विमोचन समारोह था, बल्कि यह एक प्रेरक अवसर भी था, जहां चुनौतियों, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद पर गहरे विचार सामने आए। आनंदीबेन पटेल की आत्मकथा और धनखड़ के शब्द हर उस व्यक्ति को प्रेरित करते हैं जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहता है।
Raed More:-Google NotebookLM : अब 76 नई भाषाओं में एआई पॉडकास्ट बनाएं
Click this:- Download Our News App For Latest Update and “Follow” whatsapp channel
Watch Now:- उत्तराखंड में चार धाम यात्रा की शुरुआत 30 अप्रैल से होने जा रही है.
