यूपी पुलिस में तीन आईपीएस अफसरों की बहाली या VRS पर उठे बड़े सवाल
उत्तर प्रदेश पुलिस में तीन आईपीएस अफसर लंबे समय से सस्पेंड चल रहे हैं, जिनकी बहाली या सेवा सेवानिवृत्ति (VRS) को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा विवाद में हैं जसवीर सिंह, जो छह साल से निलंबित हैं। वहीं, महिला आईपीएस अधिकारी अलंकृता सिंह तीन साल से सस्पेंड हैं और अब उन्होंने VRS की मांग की है। तीसरे अफसर अंकित मित्तल भी विवादों के बीच सस्पेंड चल रहे हैं।

कौन हैं ये तीन अफसर और क्यों हैं सस्पेंड?
जसवीर सिंह:
जसवीर सिंह की जांच डीजी स्तर के अधिकारी आनंद कुमार कर रहे थे, जो अप्रैल 2024 में रिटायर हो गए। रिपोर्ट शासन को मिली लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। जसवीर ने सरकार की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद उन पर जांच शुरू हुई और वे सस्पेंड हो गए।
अलंकृता सिंह:
अलंकृता सिंह को 27 अप्रैल 2022 को निलंबित किया गया था। वह उस समय महिला एवं बाल सुरक्षा विभाग में तैनात थीं। विदेश जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन बिना अनुमति विदेश चली गईं। इसके कारण निलंबन हुआ। उन्होंने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति (VRS) के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली।
अंकित मित्तल:
अंकित मित्तल को उनकी पत्नी द्वारा घरेलू हिंसा और अवैध संबंधों के आरोप लगने के बाद 24 जून 2024 को निलंबित किया गया था। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें पहले पद से हटाया गया और फिर सस्पेंड किया गया। उनकी पत्नी पूर्व डीजीपी गोपाल गुप्ता की बेटी हैं।
सस्पेंड अधिकारी के लिए नियम क्या हैं?
उत्तर प्रदेश में अधिकारी के सस्पेंड होने पर विभागीय जांच 6 महीने में पूरी करना जरूरी है। अगर जांच 6 महीने से अधिक खिंचती है, तो अधिकारी को बहाल कर देना चाहिए। इसके लिए केंद्र से 45 दिन के अंदर मंजूरी लेना आवश्यक होता है।
पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह बताते हैं कि दोषी अफसरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि निर्दोष अफसरों को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए। वे बताते हैं कि निलंबित अधिकारी ट्रिब्यूनल, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के रास्ते भी अपनाते हैं, लेकिन ज्यादातर अधिकारी सरकार से विवाद से बचने के लिए अदालत के चक्कर नहीं लगाते।
सस्पेंड अवधि में वेतन क्या होता है?
निलंबन के दौरान अधिकारी को निर्वाह भत्ता दिया जाता है, जो मूल वेतन का 50 प्रतिशत होता है। यदि सस्पेंड अवधि 3 महीने से अधिक हो और जांच में देरी अधिकारी की वजह से नहीं हो, तो यह भत्ता बढ़ाकर 75 प्रतिशत तक किया जा सकता है।

पुराने रिकॉर्ड में भी लंबा सस्पेंड
पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह के अनुसार, यूपी कॉडर की आईपीएस दीक्षिता का नाम सबसे लंबे समय तक निलंबित रहने वाले अफसर के रूप में दर्ज है। वे 1957 से 1975 तक लगभग 18 साल तक निलंबित रहीं।
क्या होगी तीनों अफसरों की भविष्य की राह?
अभी तक जसवीर सिंह, अलंकृता सिंह और अंकित मित्तल की बहाली या वीआरएस की प्रक्रिया अटकी हुई है। अफसरों के निलंबन का लंबा समय, जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई न होना और विभागीय धीमी गति से प्रशासनिक विवाद बढ़े हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और समय पर पूरी होती तो ऐसे विवादों से बचा जा सकता था। अब सरकार के सामने चुनौती है कि इन मामलों को जल्द सुलझाकर कानून और प्रशासन दोनों का सम्मान बनाए रखे।
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