Unique Shiv Temple Mahoba: गोरखगिरि की पावन धरा में स्थापित तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा उत्तर भारत में अपने किस्म की अनोखी प्रतिमा है, जिसका विशेष महत्व है, इस प्रतिमा का निर्माण चंदेल शासक नान्नुक ने 11वीं सदी में करवाया था, यहां महाकाल की तांडव नृत्य मुद्रा में दस भुजी गजानन प्रतिमा का निर्माण कराया गया है, अब यह मंदिर देश- विदेश में शिव तांडव के नाम से प्रसिद्ध है।
Unique Shiv Temple Mahoba: 15 फीट ऊंची है शिव प्रतिमा
महोबा में 11वीं सदी में ऐतिहासिक मदन सागर सरोवर के पश्चिम में उत्तर की तरफ शिला पर भगवान भोलेनाथ की ग्रेनाइट शिला पर 15 फीट ऊंची प्रतिमा बनवाई गई, दसभुजी तांडव नृत्य करती शिव प्रतिमा भक्तों की आस्था का केंद्र बनी हुई है। एक ऐसी ही प्रतिमा दक्षिण के ऐलोरो, हेलबिका और दारापुरम में भी विराजमान है।

Unique Shiv Temple Mahoba: बारह ज्योर्तिलिंग धाम जाने के पहले यहां करते हैं दर्शन
कहा जाता है कि, त्रेताकाल में भगवान श्री राम ने वनवास काल के दौरान कुछ समय इस स्थान में भी व्यातीत किया था। इस पहाड़ को गुरु गोरखनाथ और 7वें शिष्य दीपकनाथ के तप ने तेज प्रदान किया था। इसी पहाड़ के निचे महाकाल की शिव तांडव प्रतिमा विराजमान है।

कहते है, शिव तांडव प्रतिमा के दर्शन करने के बाद भक्त वलखंडेश्वर धाम और बारह ज्योतिर्लिंग धाम पहुंचकर कर दर्शन पूजन करते हैं।
इन दिनों लगती है भक्तों की भीड़
यहां दूर – दूर से भक्त दर्सन करने आते है, लेकिन विशेष रुप से सावन महिने और शिवरात्रि के दिन, मकर संक्रांति के समय भक्तो की काफी भीड़ देखने को मिलती है। लोग यहां सिर्फ में महोबा से ही नहीं बल्कि पूरे मध्यप्रदेश से लोग दर्शन करने आते हैं।

इतिहासकार बताते है कि, यहां विराजमान प्रतिमा को एक चट्टान पर उकेरी गई है। इसका वर्णन कर्मपुराण में भी मिलता है।
क्या है मान्यता?
मान्यता है कि यहां आकर महाकाल शिव तांडव प्रतिमा के सामने माथा टेकने से भगवान प्रसन्न होते हैं और फिर यहां सच्चे मन से जो मांगो वो मिल जाता है।

बता दें कि, शिव तांडव के मुख्य द्वार में पहरेदार के रुप में विराजमान है, जो भक्त सिद्ध बाबा मंदिर जाते है, वो यहां माथा जरुर टेकते हैं। फिर आगे बढ़ते हैं।
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