Unhealthy Food Habits: आजकल देश में बहुत बदलाव हो चुके है, चाहे बात कपड़ो की हो या खाने की विदेशी कल्चर लोग ज्यादा अपना रहें हैं। आजकल लोग इंडियन खाने से ज्यादा जंक फूड पसंद करते है, और अगर लोग कही बाहर रहते है, तब वो तो जंक फूड उनके जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन जाता है, क्योकि बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और चिप्स जैसे खाद्य पदार्थ का टेस्ट लोगों को ज्यादा पसंद आता है, और यह आसानी से मिल जाता है, इसे बच्चो से लेकर बड़ो तक सब लोग खाते है, लेकिन क्या आपको पता है, कि जंक फूड कितना हानिकारक है, आज हम इस आर्टिकल में आपको जंक फूड खाने के नुकसान के बारे में बताएंगे।
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जंक फूड क्या है?
ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें पोषक तत्वों की मात्रा बेहद कम होती है जबकि वसा, चीनी, नमक और कृत्रिम तत्वों की मात्रा अधिक होती है। ये खाद्य पदार्थ कैलोरी से भरपूर होते हैं, लेकिन शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और फाइबर नहीं प्रदान करते।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और कई पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, जंक फूड का अत्यधिक सेवन एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह कार्य करता है, जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाता है।
जंक फूड के सेवन से होते है, ये नुकसान…
मोटापा (Obesity)
जंक फूड में अत्यधिक कैलोरी और फैट्स होते हैं, जिसके ज्यादा सेवन से वजन बढ़ता है। और मोटापा किसी बीमारी से कम नहीं इससे हमारा आत्मविश्वास भी कम होता है, बीमारियों जैसे डायबिटीज, हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर का कारण भी बनता है। मोटापा आपके जीवनशैली को भी प्रभावित करता है।
डायबिटीज (Type-2 Diabetes)
चीनी से भरपूर पेय पदार्थ और मीठे स्नैक्स शरीर में ब्लड शुगर लेवल को असंतुलित करते हैं। जब लंबे समय तक जंक फूड का सेवन किया जाता है, तो अग्न्याशय पर दबाव बढ़ता है और इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है।
हृदय रोग (Heart Diseases)
जंक फूड में ट्रांस फैट, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल की उच्च मात्रा होती है, जो रक्त धमनियों को संकरा करती है और रक्तचाप को बढ़ाती है। इससे दिल के दौरे और स्ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।
पाचन संबंधी समस्याएं…
जंक फूड में फाइबर की कमी होती है, जो पाचन क्रिया को प्रभावित कर देता है, इसके कारण कब्ज, एसिडिटी और अन्य पेट संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर..
विशेषज्ञो के अनुसार, जंक फूड शरीर के साथ -साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करते है। अत्यधिक जंक फूड के सेवन से डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और नींद से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा होता है।
इस तरह से बढ़ता है, खतरा…
1. शहरी क्षेत्रों में 10 से 25 वर्ष की आयु के 60% लोग सप्ताह में कम से कम तीन बार जंक फूड का सेवन करते हैं।
2. सोशल मीडिया, विज्ञापन और प्रतिस्पर्धा ने इस प्रवृत्ति को और बढ़ावा दिया है।
3. कई माता-पिता सुविधा के लिए बच्चों को पैकेटबंद चिप्स, बिस्किट और इंस्टेंट नूडल्स दे देते हैं, जिससे बच्चो को जंक फूड खाने की आदत हो जाती है।

समाधान…
1. स्कूलों और कॉलेजों में कैन्टीन में जंक फूड के जगह हेल्दी स्नैक और हेल्दी फूड रखना चाहिए।
2. बच्चों को घर का पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन देना चाहिए, ताकि वे बाहर के खाने से दूर रहें।
3. सरकार को बच्चों के लिए बनने वाले जंक फूड विज्ञापनों पर सख्ती से प्रतिबंध लगाना चाहिए।
4. खाद्य उत्पादों पर स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी होनी चाहिए ताकि उपभोक्ता सही निर्णय ले सकें।
5. रेस्टोरेंट्स और फूड चेन को हेल्दी और लो-कैलोरी विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए।
निष्कर्ष
जंक फूड ने भले ही हमारी व्यस्त जीवनशैली को कुछ हद तक आसान बनाया हो, लेकिन इससे कई नुकसान झेलने पड़ सकती हैं। इस सोशल मीडिया और देखा देखी के चक्कर में कई चीजे बिना सोचे समझे खा लेते है, जिससे कई नुकसान हो सकते है, इसलिए समय रहते अपने और अपने बच्चों के खानपान पर ध्यान दें। ‘स्वाद’ के पीछे भागने की बजाय ‘स्वास्थ्य’ को प्राथमिकता देना चाहिए, जिससे हम स्वस्थ रह सकें।
