रामायण के पात्रों को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए बाली, सुग्रीव, अंगद और महावीर हनुमान को आदिवासी परंपरा से जुड़ा बताया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सत्तापक्ष की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आने के संकेत हैं।
धार्मिक ग्रंथों का हवाला
भोपाल में दिए गए बयान और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट में उमंग सिंघार ने कहा कि वे अपनी बात किसी राजनीतिक सुविधा या अंधविश्वास के आधार पर नहीं, बल्कि प्रमाण और इतिहास के आधार पर रखते हैं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर भाजपा अंधभक्ति से बाहर आकर ईमानदारी से इतिहास और धर्मग्रंथों के पन्ने पलटे, तो उनकी बात को झूठ कहने का साहस नहीं कर पाएगी।
गोंड धर्म ग्रंथ का जिक्र
सिंघार ने अपनी पोस्ट में ‘गोंड धर्म सद्विचार’ का हवाला देते हुए लिखा कि उसके पृष्ठ संख्या 10 पर स्पष्ट उल्लेख है कि श्रीराम के वनवास काल में जिन वानर वीरों ने उनका साथ निभाया, वे आदिवासी परंपरा से जुड़े थे। उनके मुताबिक बाली, सुग्रीव, अंगद और महावीर हनुमान गोंड, कोल और कोरकू समुदाय के धर्म योद्धा थे. उन्होंने कहा कि यह केवल मान्यता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के धार्मिक ग्रंथों में दर्ज तथ्य है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।
वानर सेना आदिवासी परंपरा से जुड़ी थी-सिंघार
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा कि यदि भाजपा यह मानने को तैयार नहीं है कि हनुमान जी सहित वानर सेना आदिवासी परंपरा से जुड़ी थी, तो उन्हें गोंड समाज के धर्मग्रंथों को पढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी समुदाय के इतिहास को नकारना सिर्फ अज्ञानता नहीं, बल्कि उस समाज के अस्तित्व और सम्मान का अपमान है। उमंग सिंघार के इस बयान ने धार्मिक, ऐतिहासिक और राजनीतिक बहस को एक साथ छेड़ दिया है।
