Umang Singhar controversial statement : मध्यप्रदेश में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आदिवासी आतंकवाद से जुड़े बयान ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। उमंग सिंघार ने कहा था कि “हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं,” जिसका भाजपा ने कड़वा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा हिंदू और हिंदुत्व के विरोध में रही है। उन्होंने कांग्रेस से माफी मांगने की भी अपील की है।
उमंग सिंघार का बयान और उसका असर
छिंदवाड़ा में एक आदिवासी कार्यक्रम के दौरान उमंग सिंघार ने खुलकर कहा, “गर्व से कहो हम आदिवासी हैं, हिंदू नहीं।” उन्होंने आदिवासी संस्कृति और धार्मिक पहचान को हिंदु धर्म से अलग बताया। इस बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी बल्कि सामाजिक स्तर पर भी कई चर्चाएं शुरू हो गईं। उमंग सिंघार के इस बयान को भाजपा ने तत्काल अपने चुनावी रणनीति के खिलाफ हथियार बना लिया।
भाजपा और मुख्यमंत्री की तीखी प्रतिक्रिया
भाजपा के विधायक और मंत्री ने उमंग सिंघार के बयान को देशद्रोह और हिंदु समुदाय के अपमान के समान बताया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस का एजेंडा हमेशा हिंदुत्व के खिलाफ रहा है। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति को देश की एकता के लिए खतरा बताते हुए, पार्टी से इस बयान पर तुरंत माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज भी हिंदू धर्म का अभिन्न हिस्सा है और इसे अलग किया जाना अस्वीकार्य है।
कांग्रेस ने किया बयान का समर्थन
वहीं कांग्रेस की ओर से उमंग सिंघार के बयान का समर्थन किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा द्वारा आदिवासियों को हिंदुत्व से जोड़ना केवल एक राजनीतिक चाल है। उनके अनुसार, आदिवासियों की अपनी अलग सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, जिसे भाजपा छुपाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने कहा कि यह बयान आदिवासियों के अधिकारों और संस्कृति को सम्मान देने का प्रयास है।
आदिवासी वोट बैंक का सियासी महत्व
मध्यप्रदेश की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक का बड़ा महत्व है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियां आदिवासियों से राजनीतिक समर्थन पाने के लिए गंभीर प्रयास करती हैं। उमंग सिंघार के बयान से राजनीतिक समीकरणों में छेड़छाड़ की संभावना जताई जा रही है। यह बयान आगामी चुनावों में आदिवासी वर्ग की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
आगे की राजनीति और संभावित परिणाम
इस बयान के बाद मध्यप्रदेश में सियासी पारा गर्म बना हुआ है। कांग्रेस को अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा और भाजपा भी इसे मुद्दा बनाकर चुनाव में भुनाने की कोशिश करेगी। नेतृत्व स्तर पर भी बयानबाजी का दौर जारी रहेगा और दोनों पक्षों के बीच तकरार बढ़ेगी। इसके साथ ही सामाजिक स्तर पर आदिवासियों और हिंदू समुदाय के बीच सामंजस्य बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी होगी।
मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आदिवासी हिंदू नहीं होने वाले बयान ने राजनीति को एक नए मोड़ पर ला दिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की तीखी प्रतिक्रिया और कांग्रेस की समर्थन नीति इस विवाद को और उग्र बना रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक दल इस मामले को अपने पक्ष में कैसे मोड़ते हैं और सामाजिक सामंजस्य को कैसे बनाए रखते हैं।
