उज्जैन – आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम शनिवार को उज्जैन में देखने को मिला, जब भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा पूरे वैभव और श्रद्धा के साथ निकाली गई। पुरी की परंपरा को जीवंत करता यह आयोजन, उज्जैनवासियों के लिए किसी भक्ति महोत्सव से कम नहीं था।
अवंतिका में पुरी की झलक
भगवान महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में संध्या आरती के दौरान भगवान महाकाल का श्रृंगार जगन्नाथ स्वरूप में किया गया। वहीं इस्कॉन मंदिर से निकली रथ यात्रा में श्रद्धालु डमरू की धुन, कीर्तन और जयकारों के बीच झूमते नजर आए। ड्रोन से हुई फूलों की वर्षा ने रथ यात्रा को स्वर्गिक बना दिया।
जगदीश मंदिर से लेकर क्षिप्रा घाट तक भक्ति की लहर
रथ यात्रा जगदीश मंदिर से शुरू होकर श्रीराम घाट तक पहुंची। हजारों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में शामिल हुए। आषाढ़ मास की द्वितीया तिथि पर उज्जैन पूरी तरह से पुरी के उत्सव रंग में रंग गया। धार्मिक नगरी उज्जैन में हर साल होने वाली यह यात्रा इस बार पहले से भी ज्यादा भव्य रही।
7 दिनों तक भगवान विश्राम में, फिर निकलेगी वापसी यात्रा
इस्कॉन मंदिर द्वारा आयोजित सांस्कृतिक पर्व 27 जून से 5 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी 7 दिनों तक गोंडिचा मंदिर में विश्राम करेंगे, और 5 जुलाई को वापसी रथ यात्रा निकाली जाएगी। यह परंपरा ओडिशा के पुरी मंदिर की तर्ज पर मनाई जाती है।
प्रदेश की सबसे बड़ी रथ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी रथ यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने कहा—“अवंतिका नगरी उज्जैन भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली है। मुझे गर्व है कि मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी रथ यात्रा यहां आयोजित की गई। उज्जैन का इतिहास पुरी से सदियों से जुड़ा है। राजा इन्द्रद्युम्न ने ही पुरी में भगवान जगन्नाथ का मंदिर बनवाया था। यह क्षण अतीत को वर्तमान में जीने जैसा है।”

CM मोहन यादव ने खींचा रथ, भगवान को किया विराजमान
रथ यात्रा के दौरान कालिदास अकादमी परिसर स्थित गोंडिचा मंदिर में विश्राम स्थल बनाया गया। यहां मुख्यमंत्री ने स्वयं भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं उठाईं, उन्हें सिंहासन पर विराजित किया, चंवर से हवा की, आरती उतारी और रथ भी खींचा। यह दृश्य हर भक्त के लिए भावविभोर कर देने वाला रहा।
गीता ऐप लॉन्च और प्रदर्शनी का लोकार्पण
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘गीता परीक्षा ऐप’ लॉन्च किया, जिसे विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा विकसित किया गया है। यह ऐप लाखों छात्रों को एक साथ गीता परीक्षा देने की सुविधा देगा। साथ ही, कालिदास अकादमी परिसर में भगवान जगन्नाथ की लीलाओं और रथ यात्राओं पर आधारित प्रदर्शनी का भी लोकार्पण किया गया।
सांस्कृतिक पर्व और रथ यात्रा का महत्व
यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उज्जैन की संस्कृति, परंपरा और अध्यात्म का उत्सव है। इस्कॉन मंदिर उज्जैन, देश के प्रमुख तीन इस्कॉन मंदिरों में से एक बन गया है। हर साल यह आयोजन उज्जैन को भक्ति, संस्कृति और पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनाता है।
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