Raigarh elephant death: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में दो हाथी शावकों की मौत ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घरघोड़ा रेंज की कुरकुट नदी में दोनों के शव मिलने के बाद मामला गरमा गया है। अब छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर लापरवाही बताते हुए दिल्ली में शिकायत करने की बात कही है।
Raigarh elephant death: नदी में दो हाथियों के शव मिले
मामला रायगढ़ जिले की घरघोड़ा वन परिक्षेत्र का है। यहां कुरकुट नदी में दो हाथी शावकों के शव मिले, जिन्हें देखने से अंदाजा लगाया गया कि उनकी मौत करीब तीन से चार दिन पहले हो चुकी थी। जांच के दौरान प्राथमिक तौर पर सामने आया कि दोनों शावक करंट की चपेट में आ गए थे।घटना की जानकारी वन विभाग को सीधे मौके से नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जरिए मिली। बताया जा रहा है कि कई दिनों तक शव नदी में पड़े रहे, लेकिन संबंधित वनकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। जब स्थानीय लोगों ने सूचना दी, तब जाकर वन अमला मौके पर पहुंचा।
Raigarh elephant death: दो लोग गिरफ्तार
इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, अब तक उन वनकर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है जिनकी जिम्मेदारी इलाके की निगरानी की थी। यही वजह है कि अब लापरवाही को लेकर सवाल तेज हो गए हैं।छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य गोपाल अग्रवाल का कहना है कि इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और ज्यादातर मामलों में करंट का इस्तेमाल कर वन्यजीवों का शिकार किया जाता है। उन्होंने कहा कि जंगलों में निगरानी व्यवस्था कमजोर होने की वजह से शिकारी आसानी से सक्रिय हो जाते हैं। इस पूरे मामले की शिकायत दिल्ली में आईजीपीएफ से करने की बात भी उन्होंने कही है।
ग्रामीणों ने की जांच की मांग
उधर, युवा कांग्रेस के ग्रामीण जिलाध्यक्ष उस्मान बेग ने भी कलेक्टर और डीएफओ को आवेदन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी होती, तो शायद इन हाथी शावकों की जान बचाई जा सकती थी।घरघोड़ा प्रभारी रेंजर विक्रांत कुमार के मुताबिक घटना छर्राटांगर सर्किल की है। उन्होंने बताया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टरों ने शव करीब 3–4 दिन पुराना होने की आशंका जताई है। कुछ अंग सड़ चुके थे, इसलिए सैंपल लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इन पर गिरी गाज
दरअसल, रायगढ़ जिले में हाथियों की मौत का यह पहला मामला नहीं है। अक्टूबर 2024 में तमनार रेंज के समारुमा सर्किल के कचकोबा क्षेत्र में भी तीन हाथियों की मौत हुई थी। उस मामले में जांच के बाद बीटगार्ड की लापरवाही सामने आई थी और तत्कालीन डीएफओ ने परिसर रक्षक को निलंबित कर दिया था।
