मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिवसीय माइनिंग कॉन्क्लेव की शुरूआत हो गई है जिसमें माइनिंग कॉन्क्लेव में करीब 600 उद्योगपति और निवेशक शामिल हो रहे हैं। इस कार्यक्रम का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में हो रहा है। माइनिंग कॉन्क्लेव में खनिजों की खोज और खनन बढ़ाने पर चर्चा होगी। खनन और खनिज के मामले में एमपी,झारखंड की बराबरी पर आना चाहता है। खनन,खनिज आधारित उद्योगों में झारखंड को सबसे ज्यादा कमाई होती है। आकड़ों के मुताबिक झारखंड राज्य सालाना 13 हजार करोडं रुपए का राजस्व जुटाता है। तो उसी राह पर चलकर मध्यप्रदेश भी झारखंड की बराबरी पर आना चाहता है। माइनिंग कॉन्क्लेव के जरिए प्रदेश में दो हजार करोड़ सालाना राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।लक्ष्य हासिल कर राजस्व प्राप्ति के मामले में झारखंड को छूने की योजना है। आपको बता दें कि यह कार्यक्रम दो दिवसीय है जोकि 18 अक्टूबर को इसका समापन है। आपको बतादें कि इस माइनिंग कॉन्क्लेव के कार्यक्रम के लिए प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने अलग अलग राज्यों में जाकर उद्योगपतियों को निमंत्रण दिथा था। जिसमें उद्योगपतियों ने सहमति दी थी। HCL,NCL,IREL, MOIL,NMDC,OMC जैसी नामी गिरामी कंपनियों के प्रतिनिधि माइनिंग कॉन्क्लेव में शिरकत कर रहे हैं. 18 अक्टबूर को माइनिंग कॉन्क्लेव के सत्र का समापन होगा। आपको बतादें कि कुछ दिनों पहले जबलपुर में में रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था. रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में 1,500 निवेशकों शामिल होने की उम्मीद जताई गयी थी. मध्य प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्राथमिकताओं में रोजगार और निवेश शामिल है. रीजनल इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव के बाद अब माइनिंग कॉन्क्लेव की दो दिवसीय शुरुआत हुई है.
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