
एक लड़ाई और दो जिद्दी नेता। रूस-यूक्रेन जंग में 3 साल से खून बह रहा है, लेकिन अब लगता है जैसे खेल का रुख बदल सकता है।
आज व्हाइट हाउस में ट्रम्प और जेलेंस्की की मुलाकात सिर्फ एक बैठक नहीं शायद ये युद्ध विराम की आखिरी कोशिश है।
पुतिन से नाकाम लौटे ट्रम्प, अब जेलेंस्की के सामने प्रस्ताव
तीन दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रम्प ने अलास्का में पुतिन से मुलाकात की थी। 3 घंटे की मैराथन मीटिंग, गर्म चाय और ठंडी बातें।
पर नतीजा? कुछ नहीं। पुतिन अड़े हैं, बोले यूक्रेन के कब्जाए गए 20% हिस्से को हम नहीं छोड़ेंगे। अब ट्रम्प की नजर उस नेता पर है जो हर बार बिना झुके खड़ा रहा वोलोदिमिर जेलेंस्की।
व्हाइट हाउस में होगी बड़ी बैठक, यूरोप के बड़े नाम भी शामिल
इस मीटिंग की अहमियत सिर्फ इसलिए नहीं कि ये दो राष्ट्राध्यक्ष आमने-सामने बैठेंगे। ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, जर्मनी के चांसलर मर्त्ज, इटली की पीएम मेलोनी और नाटो प्रमुख मार्क रूटे भी शामिल होंगे। ये लगभग एक मिनी वैश्विक सम्मेलन जैसा है जिसका मकसद सिर्फ एक है रूस-यूक्रेन जंग को कैसे रोका जाए?
ट्रम्प की पुरानी योजना फिर चर्चा में
ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं अगर शांति चाहिए, तो यूक्रेन को जमीन छोड़नी होगी। यानी रूस को वो हिस्से दिए जाएं जो उसने कब्जा किए हैं, और बदले में जंग बंद। लेकिन क्या जेलेंस्की मानेंगे?
7 महीने में तीसरी बार आमने-सामने
ट्रम्प और जेलेंस्की की पिछली मुलाकातें तनावपूर्ण रहीं। वॉशिंगटन में तीखी बहस हुई थी। ट्रम्प बोले थे यूक्रेन थर्ड वर्ल्ड वॉर के साथ जुआ खेल रहा है।” जेलेंस्की ने कहा हम अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे, कीमत चाहे जो हो।” 26 अप्रैल को रोम में पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार के दौरान मुलाकात हुई, लेकिन तब भी कोई ठोस बात नहीं बन पाई।
जेलेंस्की के एजेंडे पर 3 बातें
आज की मीटिंग में यूक्रेनी राष्ट्रपति तीन बिंदुओं पर डटे रहेंगे आम नागरिकों की हत्याएं बंद हों, रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगें पहले स्थायी सीजफायर, फिर सुरक्षा गारंटी उनका कहना है
हमारी जमीन, हमारी आत्मा है। उसे हम सौदेबाज़ी में नहीं डाल सकते।
पुतिन की शर्तें: यूक्रेन नाटो में न जाए, कब्जा बना रहे
पुतिन की सोच सीधी है पर सख्त यूक्रेन नाटो में शामिल न हो, कब्जाए गए क्षेत्र (क्रीमिया, डोनेट्स्क, लुहांस्क आदि) रूस के हिस्से में रहें वे इसे इतिहास और सुरक्षा का मसला मानते हैं। ट्रम्प के सामने उन्होंने साफ कहा अगर यूक्रेन नाटो छोड़ने को तैयार हो, तो आगे बात हो सकती है।
समझौते की डगर मुश्किल
जेलेंस्की कह चुके हैं
हमारे संविधान और जनता की इच्छा के खिलाफ कोई फैसला नहीं हो सकता। ये सिर्फ सत्ता की नहीं, अस्तित्व की लड़ाई है।”
इसका मतलब ये है कि बिना किसी शर्त के युद्धविराम, तभी बात आगे बढ़ेगी। लेकिन ट्रम्प की नजर तीव्र, दिखावटी और ‘सौदेबाज़ी वाली’ डील पर है।
दुनिया की नजरें व्हाइट हाउस पर
यूरोप सांस रोककर देख रहा है अमेरिका में चुनावी साल है, ट्रम्प के लिए ये मीटिंग इमेज बिल्डिंग का मौका है जेलेंस्की को डर है कि कहीं अमेरिका उनका समर्थन खींच न ले और रूस… अपनी जिद पर कायम है
क्या ये जंग खत्म होगी?
आज की मुलाकात निर्णायक हो सकती है, लेकिन सवाल बहुत हैं क्या यूक्रेन जमीन छोड़ने को तैयार होगा? क्या पुतिन समझौते की राह पर आएंगे? क्या ट्रम्प सिर्फ डील के लिए दबाव बना रहे हैं या वाकई शांति चाहते हैं? जवाब आने बाकी हैं। लेकिन इतना तय है कि आज व्हाइट हाउस में सिर्फ नेता नहीं, पूरी दुनिया की उम्मीदें बैठी होंगी।
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