
trump thailand cambodia ceasefire india pak memory : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमावर्ती संघर्ष को भारत–पाकिस्तान विलय संघर्ष की याद दिलाते हुए दोनों देशों से तत्काल वार्ता और युद्धविराम की मांग की है। यह तनाव पुराने मंदिरों के विवाद से शुरू हुआ और विवाद अब चार दिन से जारी है, जिसमें कम से कम 33 लोग मारे गए, और 160,000 से अधिक नागरिक विस्थापित हुए हैं ।
ट्रम्प का संदेह और व्यापार का दबाव
26 जुलाई, 2025 को ट्रम्प ने Truth Social पर कहा, “मैंने कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेट से बात की और अब थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायाचाई को कॉल करने जा रहा हूँ”। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लड़ाई जारी रही तो अमेरिका किसी भी व्यापार सौदे पर विचार नहीं करेगा ।
ट्रम्प ने कहा,
“बहुत से लोग इस जंग में मारे जा रहे हैं, यह भारत–पाक संघर्ष जैसी याद दिलाती है, जिसे हमने कामयाबी से रोका था”
दोनों देश तैयार सीजफायर पर
कंबोडिया ने तुरंत बिना शर्त युद्धविराम स्वीकार कर लिया, और वार्ता के माध्यम से संघर्ष समाप्त करने का भरोसा जताया है। Hun Manet ने इस बीच मलेशिया की मध्यस्थता का भी ज़िक्र किया थार थाईलैंड ने भी सिद्धांततः सीजफायर पर सहमति दी, लेकिन फर्मी से कहा कि कंबोडिया की सच्ची मंशा पहले स्पष्ट होनी चाहिए

सीमा विवाद की वास्तविकता
दोनों देशों के बीच यह तनाव 24 जुलाई से शुरू हुआ, जिसमें एक भूमिगत विस्फोट ने थाई सैनिकों को घायल किया, और फिर दोनों तरफ से जवाबी हमलों का सिलसिला शुरू हुआ। विवाद खासकर प्रीह विहियर मंदिर और अन्य पुरातन स्थलों के अधिकार को लेकर है
मानवीय और राजनैतिक प्रभाव
विवाद चार दिन तक जारी रहने के कारण, थाईलैंड ने आठ जिलों में मार्शल लॉ घोषित, कई स्कूल और अस्पताल बंद किए। कंबोडिया ने सुरक्षा परिषद में थाईलैंड पर आक्रमण का आरोप लगाया, जबकि थाईलैंड ने कंबोडिया को landmines बिछाने और नागरिक इलाकों में गोलीबारी का दोषी ठहराया
भारत की प्रतिक्रिया
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने सीमा क्षेत्र में यात्रा से बचने की सलाह दी है और भारतीय नागरिकों को दूतावास संपर्क नंबर प्रदान किए गए हैं। साथ ही भारत गम्भीरता से इस तनाव को देख रहा है
ट्रम्प की रणनीति में व्यापारिक दबाव को शांति कूच के लिए अपनाया गया, जैसे उन्होंने संकेत दिया कि 36% टैक्स लागू हो सकता है यदि लड़ाई खत्म नहीं होती। यह कदम उनकी भारत–पाक संघर्ष में मध्यस्थता की पूर्वदृष्टि पर आधारित था, हालांकि भारत ने उस समय ट्रम्प की भूमिका को आधिकारिक तौर पर स्वीकार नहीं किया था

