ट्रंप-शहबाज की दूसरी मुलाकात, भारत के लिए अलर्ट?

व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी PM और सेना प्रमुख की ट्रंप से गुप्त मीटिंग
trump pak pm army chief: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने 26 सितंबर को देर रात व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। यह 3 दिनों में दूसरी बार हुई मीटिंग है। इससे पहले 23 सितंबर को UN महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में दोनों नेताओं ने मुलाकात की थी।
यह मुलाकात मीडिया से दूर, बंद कमरे में हुई। शहबाज शरीफ को ट्रंप ने 30 मिनट इंतज़ार कराया, जबकि वो पत्रकारों से बात कर रहे थे।
मुलाकात से जुड़े अहम बिंदु
- रात 2 बजे शहबाज व्हाइट हाउस पहुंचे, ट्रंप ने 30 मिनट इंतजार कराया
- ट्रंप ने मीटिंग से पहले कहा: “एक महान नेता और फील्ड मार्शल आ रहे हैं”
- बातचीत 1 घंटा 20 मिनट चली, रात 3:48 बजे शहबाज रवाना हुए
- व्हाइट हाउस ने कोई आधिकारिक तस्वीर या वीडियो जारी नहीं किया
- बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद थे
- जुलाई में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच तेल भंडार सहयोग समझौता भी हो चुका है
भारत के लिए क्या मायने हैं इस मुलाकात के?
यह मुलाकात भारत के लिहाज से कई वजहों से अहम है
1. भारत-अमेरिका के रिश्तों में संभावित तनाव
- ट्रंप भारत पर उच्च टैरिफ और वीजा नियमों को लेकर पहले ही नाराज़गी जता चुके हैं।
- भारत ने ट्रंप के सीजफायर वाले दावों को खारिज किया है, जिससे रिश्तों में तनाव आया है।
2. पाकिस्तान को अमेरिकी मान्यता मिल रही?
- 6 साल बाद किसी पाकिस्तानी PM की अमेरिकी राष्ट्रपति से मुलाकात
- ट्रंप की “फील्ड मार्शल” कहने वाली टिप्पणी से सैन्य रिश्तों को बल मिला है
- मुनीर की लगातार दो बार अमेरिका यात्रा, ट्रंप द्वारा लंच पर बुलाना—सभी कूटनीतिक संकेत हैं
3. नोबेल की राजनीति और छवि निर्माण
- पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामिनेट किया है
- यह ट्रंप के चुनावी फायदे के लिए भी अहम मुद्दा बन सकता है
व्हाइट हाउस की चुप्पी क्या दर्शाती है?
आमतौर पर ऐसी बैठकों की तस्वीरें और वीडियो जारी किए जाते हैं लेकिन ट्रंप-शहबाज-मुनीर की किसी भी मुलाकात का कोई फुटेज या फोटो जारी नहीं किया गया यह दर्शाता है कि यह मीटिंग संवेदनशील मुद्दों पर थी, जैसे:
- गाजा युद्ध
- अफगानिस्तान और तालिबान नीति
- भारत-पाक तनाव
- चीन से सैन्य गठजोड़ और खुफिया सहयोग
ट्रंप और पाकिस्तान- पुराना रिश्ता
- जुलाई 2019: इमरान खान और ट्रंप की चर्चित व्हाइट हाउस मीटिंग
- ट्रंप कई बार कहते रहे हैं कि “भारत-पाक तनाव” कम करने में उन्होंने भूमिका निभाई
- हालांकि भारत सरकार ने कभी भी ट्रंप के इस दावे की पुष्टि नहीं की
क्या ये भारत के लिए खतरे की घंटी है?
भारत को इस घटनाक्रम को हल्के में नहीं लेना चाहिए अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती निकटता से रणनीतिक असंतुलन हो सकता है ट्रंप प्रशासन की नीतियां अक्सर चौंकाने वाले मोड़ लेती हैं व्यापार, वीजा या रक्षा समझौतों पर
भारत को क्या करना चाहिए?
कूटनीतिक रूप से सतर्क रहना चाहिए, विशेषकर अमेरिका में चुनावी साल में Quad और Indo-Pacific नेटवर्क को मजबूत बनाए रखना जनसंपर्क और लॉबिंग के ज़रिए अमेरिकी नीति-निर्माताओं को भारत का पक्ष स्पष्ट करना अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के सांसदों और समुदाय से कूटनीतिक सहयोग लेना चाहिए।

