“आई लव पाकिस्तान” सिर्फ जुमला नहीं, ट्रम्प की रणनीति की झलक है
जब किसी देश के राष्ट्रपति के मुंह से ये शब्द निकलते हैं “I love Pakistan” तो ये सिर्फ भावनात्मक बयान नहीं होता। इसके पीछे छुपा होता है एक गहरी रणनीति, आर्थिक चाल और कूटनीति की परतें।
डोनाल्ड ट्रम्प, जो एक दिन पहले तक भारत पर 26% टैरिफ लगाने की बात कर रहे थे, अब पाकिस्तान को 10% की राहत देकर 19% पर लाकर खड़ा कर रहे हैं। और भारत को सिर्फ 1% की राहत। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है ट्रम्प पाकिस्तान पर इतने मेहरबान क्यों हो गए? और क्या भारत अब अमेरिका की प्राथमिकता नहीं रहा?
तस्वीर को जोड़ते हैं: 2 दिन में 2 इनाम
- पहला इनाम: ऑयल एंड ट्रेड डील अमेरिका पाकिस्तान में तेल की खोज, प्रोसेसिंग और स्टोरेज में मदद करेगा।
- दूसरा इनाम: सिर्फ 19% टैरिफ जो पूरे साउथ एशिया में सबसे कम है।
ये सिर्फ इत्तेफाक नहीं। ये संकेत है एक बदलती दोस्ती का, एक बढ़ती साझेदारी का।
6 वजहें, जो ट्रम्प को पाकिस्तान की तरफ खींच रही हैं
जियो-स्ट्रैटेजिक लोकेशन
पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति अमेरिका के लिए एक जासूसी चौकी की तरह है ईरान और अफगानिस्तान से सटी सीमा, और चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना से जुड़ाव।
ट्रम्प जानते हैं कि पाकिस्तान में असर बढ़ाकर वो चीन और ईरान दोनों को बैलेंस कर सकते हैं।
भारत को ‘संदेश’ देना
भारत भले अमेरिका का रणनीतिक पार्टनर हो, लेकिन कई मुद्दों पर दोनों की तनातनी जगजाहिर है जैसे रूस से हथियार खरीद, WTO पर मतभेद, और अमेरिकी कंपनियों को भारत में एक्सेस देने से इनकार।
पाकिस्तान को तरजीह देना एक ‘साफ़ संकेत’ है कि अमेरिका के पास विकल्प हैं।
चीन पर दबाव की रणनीति
चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश किया है। अब अमेरिका पाकिस्तान में अपने व्यापार और सुरक्षा समझौते बढ़ाकर CPEC जैसे प्रोजेक्ट्स पर प्रभाव डाल सकता है।
पाकिस्तानी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बूस्ट देना
अमेरिका को 60% निर्यात सिर्फ कपड़े से आता है पाकिस्तान से। भारत और बांग्लादेश पर ज्यादा टैरिफ लगाकर, ट्रम्प ने पाकिस्तान को टेक्सटाइल मार्केट में अकेला खिलाड़ी बना दिया है।
डिजिटल टैक्स हटाने की ‘रसीद’
पाकिस्तान ने जब अमेरिका के डिजिटल कंपनियों पर 5% टैक्स हटाया, ट्रम्प ने बदले में टैरिफ कम कर दिया। एक तरह से ये Give & Take डिप्लोमेसी है।
ट्रम्प को ‘नोबेल’ के लिए नामांकन
अब ये बात तो थोड़ी फिल्मी लग सकती है, लेकिन राजनीति में कुछ भी मुमकिन है। पाकिस्तान ने जून में ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था।
ट्रम्प इसे अपनी जीत मानते हैं। और चुनावी साल में उन्हें एक ‘मुस्लिम देश के समर्थन’ की ज़रूरत भी है।
भारत के लिए चेतावनी का संकेत?
भारत को अब ये समझना होगा कि मित्र देश भी सिर्फ स्थायी हित देखते हैं, दोस्ती नहीं। ट्रम्प जैसे नेता भावनाओं से नहीं, सौदेबाज़ी और PR के तराजू पर फैसले करते हैं।
जहाँ पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक रणनीतिक ‘हथियार’ बनता जा रहा है, वहीं भारत को अब और ज्यादा मजबूत, निर्णायक और लचीली नीति अपनानी होगी खासकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और डिप्लोमेसी में।
दोस्ती नहीं, डील्स चलती हैं
“आई लव पाकिस्तान” शायद एक बयान था, लेकिन उसके पीछे छिपी कहानी व्यापार, रणनीति और आत्महित की राजनीति की है। भारत को भी अब इस खेल को समझना होगा जहाँ इमोशन नहीं, इकोनॉमिक्स बोलती है। ट्रम्प की ये मेहरबानी पाकिस्तान के लिए जीत जरूर है, लेकिन भारत के लिए नींद से जागने की घंटी भी।
Read More:- इंडिगो फ्लाइटः युवक को आया पैनिक अटैक, यात्री ने जड़ दिया थप्पड़
Watch Now :-कुल्लू जिले में लगातार बारिश और अचानक आई बाढ़
