trump nato iran oil talk: संयुक्त राज्य और ईरान के बीच पैसों और तेल को लेकर नए आर्थिक रास्ते खुलेंगे
trump nato iran oil talk: नाटो शिखर सम्मेलन (NATO Summit) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नीदरलैंड्स की हेग में एक बेहद चौंकाने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि ईरान ने हाल ही में लड़ा युद्ध बहुत शौर्यपूर्वक लड़ लिया है और अब उसे नुकसान से उबरने के लिए तेल बेचने की पूरी आज़ादी मिलनी चाहिए। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि चाहे चीन ईरान से तेल खरीदे, उससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।
Read More :- इमरजेंसी के 50 साल पूरे: कैबिनेट की एक बैठक में दो मिनट का मौन
ट्रम्प का बयान क्या था?
ट्रम्प ने कहा:
“ईरान ने जंग बहादुरी से लड़ी। वे तेल का कारोबार करते हैं। मैं चाहूं तो इसे रोक सकता हूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं करना चाहता।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत “अगले हफ्ते” शुरू होगी।
इसका मतलब यह है कि ट्रम्प विदेश नीति में एक नए रुख की ओर इशारा कर रहे हैं – यानी आर्थिक प्रतिबंधों का आक्रामक रूप से पालन न करना लेकिन बातचीत को प्राथमिकता देना।
क्या यह प्रतिबंधों की ढील है?
व्हाइट हाउस की ओर से यह साफ कर दिया गया कि ट्रम्प का यह बयान अमेरिकी प्रतिबंधों को ढीला करने का संकेत नहीं है। यह सिर्फ व्यापार को लेकर अधिकारों को लेकर उनका रुख दर्शाता है। इसलिए यह “आर्थिक प्रतिबंधों में ढील” जैसी खबरों पर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं ।
वैश्विक समझौतों पर प्रभाव
- ट्रम्प ने चीन को क़रीब से देखा –
उन्होंने कहा कि अगर चीन ईरान से तेल ख़रीदना चाहे तो उन्हें कोई ‘प्रॉब्लम’ नहीं है। कंपनी व्यापार की भाषा को विश्वव्यापी तौर पर स्वीकार किया जा सकता है । - ईरान-इज़राइल युद्ध में लगी ‘सीज़फायर’ की बातचीत
ट्रम्प ने मंगल वार को यह भी बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच चर्चा अगले हफ्ते शुरू हो सकती है, जिससे अब राजनीतिक बातचीत का मार्ग खुल सकता है ।
नाटो में ट्रम्प की रणनीति
- ट्रम्प ने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान आत्मविश्वास दिखाया और कहा कि उसने सोचा था नाटो नेता सिर्फ यूनाइटेड स्टेट्स को बुला रहे हैं, लेकिन उन्होंने देखा कि सभी देश अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए खुद ज़िम्मेदार हो रहे हैं ।
- नाटो नेताओं ने अभी 5% सकल घरेलू उत्पाद (GDP) रक्षा खर्च का लक्ष्य अपनाया, और ट्रम्प ने इसे सराहा – यह ट्रम्प द्वारा ट्रांसआटलांटिक साझेदारी को मजबूत करने का संकेत था ।
ट्रम्प ने नाटो समिट के मंच से स्पष्ट रूप से दो संदेश दिए
- ईरान की बहादुरी को सम्मान देते हुए उसे तेल बेचने की आज़ादी दें।
- अगले हफ्ते बातचीत की दिशा में प्रयास हों।
इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा नीति, आर्थिक प्रतिबंधों और अमेरिकी विदेश नीति के बीच संतुलन बनाए रखने की मुद्रा का संकेत दिया। अब सवाल यह है कि क्या इस रुख से संयुक्त राज्य और ईरान के बीच पैसों और तेल को लेकर नए आर्थिक रास्ते खुलेंगे, और वैश्विक तेल बाजार पर इसका क्या असर होगा?
Watch Now :- अब ट्रेन का इंतज़ार बन जाएगा एक शानदार अनुभव!

