मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच डोलाल्ड ट्रंप के एक बयान ने वैश्विक राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। ट्रम्प ने साफ कहा कि वह ईरान के तेल पर नियंत्रण चाहते हैं और जरूरत पड़ने पर खार्ग द्वीप पर कब्जा भी किया जा सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में पहले से चल रहा विवाद और गहरा गया है.
क्यों अहम है खार्ग द्वीप
खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यात केंद्र है। यहां से देश का करीब 90% कच्चा तेल दुनिया भर में भेजा जाता है. रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस द्वीप पर किसी भी प्रकार का सैन्य दबाव बनता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
जंग के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई
रविवार को ईरान ने इजराइल पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजराइली सेना का दावा है कि अधिकांश मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया गया. दक्षिणी इजराइल के औद्योगिक इलाकों में हमलों के बाद आग लगने की घटनाएं सामने आईं, जिससे हालात और गंभीर हो गए हैं।
खाड़ी देशों में भी बढ़ी हलचल
खाड़ी देशों में भी मिसाइल और ड्रोन गतिविधियां बढ़ी हैं। कई जगह एयर डिफेंस सिस्टम ने हमलों को नाकाम किया, लेकिन क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है.इजराइल ने कई इलाकों में सुरक्षा नियम कड़े कर दिए हैं। स्कूल और सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं. वहीं अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और अधिक संवेदनशील बने रहने की आशंका है।
वैश्विक बाजार पर दिखने लगा असर
इस संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ हार्मूज में तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और महंगाई में तेजी आ सकती है।
