
trump h1b visa abuse probes: न्यूयॉर्क, अमेरिकी प्रशासन ने H-1B वीज़ा कार्यक्रम में संभावित धोखाधड़ी और दुरुपयोग की जांच के लिए 175 नए मामले शुरू किए हैं। इन जांचों का उद्देश्य अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा करना और विदेशी वर्कर्स के साथ होने वाली अनियमितताओं को रोकना बताया गया है।
H-1B वीज़ा विशेष रूप से तकनीकी कंपनियों द्वारा उच्च-कुशल विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, इन जांचों में कम वेतन, अवास्तविक वर्क साइट्स और कर्मचारियों को “बेंचिंग” पर रखने जैसी गलत प्रथाओं की पहचान की जा रही है।
trump h1b visa abuse probes: ट्रम्प प्रशासन की कार्रवाई
श्रम विभाग ने शुक्रवार को X प्लेटफ़ॉर्म पर बताया कि प्रशासन ने अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के हिस्से के रूप में 175 जांचें शुरू की हैं। विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और श्रम सचिव लॉरी चावेज़-डेरेमर के नेतृत्व में अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
चावेज़-डेरेमर ने कहा कि श्रम विभाग “H-1B वीज़ा के दुरुपयोग को रोकने और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग कर रहा है। राष्ट्रपति के नेतृत्व में हम अपने कार्यबल में निवेश जारी रखेंगे और उच्च-कुशल नौकरी के अवसर अमेरिकी कर्मचारियों के लिए सुनिश्चित करेंगे।”
जांच में सामने आई अनियमितताएँ
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कम वेतन: कई विदेशी कर्मचारी, जिनके पास उन्नत डिग्रियाँ हैं, उन्हें उनके जॉब विवरण में वर्णित वेतन से काफी कम भुगतान किया जा रहा था।
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वर्क साइट्स की असंगति: दस्तावेज़ों में उल्लिखित कई वर्क साइट्स वास्तविकता में मौजूद नहीं थीं।
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बेंचिंग: कुछ कर्मचारियों को सक्रिय प्रोजेक्ट के बीच कोई वेतन दिए बिना “बेंचिंग” पर रखा गया।
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USCIS सूचनाओं में देरी: H-1B वीज़ा धारकों की नौकरी समाप्त होने पर कंपनियों ने USCIS को देर से सूचित किया।
श्रम विभाग के अनुसार, ये प्रथाएँ न केवल विदेशी कर्मचारियों बल्कि अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन पर भी नकारात्मक असर डालती हैं।

भारतीय पेशेवरों पर असर
H-1B वीज़ा धारकों में भारतीय तकनीकी कर्मचारी और चिकित्सक सबसे बड़ी संख्या में शामिल हैं। Fox News के अनुसार, 175 जांचों में कुल 15 मिलियन डॉलर की पिछली मजदूरी का भुगतान होना बाकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय पेशेवरों के लिए यह कदम नौकरी की सुरक्षा और वर्कप्लेस पारदर्शिता बढ़ा सकता है, लेकिन तकनीकी कंपनियों में विदेशी कर्मचारियों की भूमिका को देखते हुए प्रभाव जटिल और बहुपक्षीय हो सकता है।
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