Skip to content
nationmirror.com

Nationmirror.com

Primary Menu
  • देश-विदेश
  • मध्य प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • हिमाचल प्रदेश
  • पंजाब
  • हरियाणा
  • गुजरात
  • राजस्थान
  • बिहार
  • झारखंड
  • जुर्म गाथा
  • खेल
  • फाइनेंस
  • ENTERTAINMENT
  • सनातन
  • Lifestyle
  • Infotainment
Video
  • Home
  • सनातन
  • Significance of Tripund: शिवलिंग पर त्रिपुंड क्यों लगाया जाता है? जानिए इसका महत्व…
  • सनातन

Significance of Tripund: शिवलिंग पर त्रिपुंड क्यों लगाया जाता है? जानिए इसका महत्व…

Hema Gupta July 18, 2025

Significance of Tripund: सावन का महीना हर साल भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। ये महीना भक्ति, तप, व्रत और पूजा का प्रतीक होता है। सावन का आगमन होते ही मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। महिलाएं, पुरुष और खासकर कुंवारी कन्याएं शिवजी की पूजा में लीन हो जाती हैं। सावन की शुरुआत तो 11 जुलाई से हो चुकी हैं।

Read More: Sawan Somwar Vrat 2025: सावन सोमवार व्रत? जानिए व्रत विधि और धार्मिक महत्व…

भगवान शिव के माथे पर भस्म या चंदन से बनी तीन आड़ी रेखाओं को त्रिपुंड कहते हैं। आज हम इस आर्टिकल में त्रिपुंड के महत्व के बारें में बताएंगे।

त्रिपुंड किसका प्रतीक हैं?

शिव के माथे पर लगे तीन रेखाओं से लगा तिलक को त्रिपुंड कहते हैं, जिसका अर्थ इच्छाशक्ति, ज्ञानशक्ति और क्रियाशक्ति का प्रतीक है, जो शिव की तीन fundamental powers को दर्शाती हैं। इसके अलावा कहा जाता है, इस तिलक में 27 देवताओं का वास होता है। और प्रत्येक रेखा में 9 देवताओं का वास होता है।

आपको बता दें कि, हिंदू धर्म में चाहे आप मंदिर जाएं या घर में पूजा करें, भक्त तिलक जरुर लगाते है। और इस तिलक भी विशेष महत्व माना जाता है। और भगवान शिव जी के जो भी भक्त होते है, वो चंदन या भस्म का तिलक लगाते है, जिसे त्रिपुंड कहते है। त्रिपुंड को अनामिका और मध्यमा उंगलियों से लगाया जाता है।

त्रिपुंड की तीन रेखाओं का क्या अर्थ हैं?

1. इच्छाशक्ति (Kriyashakti)

यह पहली रेखा है, जो रचनात्मक ऊर्जा और कर्म करने की इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है।

2. ज्ञानशक्ति (Ichhashakti)

यह दूसरी रेखा है, जो ज्ञान और समझ की शक्ति को दर्शाती है।

3. क्रियाशक्ति (Gyan Shakti)

यह तीसरी रेखा है, जो कर्म को क्रियान्वित करने की शक्ति का प्रतीक है

इन देवी – देवताओं का त्रिपुंड में होता है वास…

वैदिक शास्त्रों के अनुसार, त्रिपुंड की तीनों रेखाओं में कुल 27 देवी-देवताओं का वास होता है। प्रत्येक रेखा में 9-9 देवताओं की उपस्थिति मानी गई है:

पहली रेखा (ऊपरी रेखा)

महादेव, पृथ्वी, ऋग्वेद, धर्म, गार्हपत्य अग्नि, रजोगुण, आकार, प्रातः हवन, क्रियाशक्ति।

दूसरी रेखा (मध्य रेखा)

इच्छाशक्ति, अंतरात्मा, दक्षिणाग्नि, सत्त्वगुण, महेश्वर, ओंकार, आकाश, मध्याह्न हवन, आत्मतत्व।

तीसरी रेखा (निचली रेखा)

शिव, आहवनीय अग्नि, सामवेद, ज्ञानशक्ति, तृतीय हवन, स्वर्ग लोक, तमोगुण, परमात्मा, निर्वाणशक्ति।

इन रेखाओं का तात्त्विक अर्थ यह भी है कि यह शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने वाला तिलक है।

क्या है त्रिपुंड लगाने का सही तरीका..

त्रिपुंड सिर्फ चंदन, भस्म या अष्टगंध से ही लगाया जाना चाहिए। सोमवार को शिवलिंग पर चढ़ाई गई भस्म से त्रिपुंड लगाना अत्यंत शुभ माना गया है। त्रिपुंड मस्तक पर तीन आड़ी रेखाएं बनाकर लगाया जाता है। दो रेखाएं मध्यमा (अनामिका) उंगली से ऊपर की ओर
तीसरी रेखा तर्जनी उंगली से नीचे, इसे हमेशा बाएं नेत्र से दाएं नेत्र की ओर ही लगाना चाहिए। त्रिपुंड लगाते समय मुख उत्तर दिशा की ओर रखें।

तिलक लगाने से पहले “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए और महादेव तथा 27 देवताओं को प्रणाम करना चाहिए।

त्रिपुंड लगाने के धार्मिक लाभ…

1. 27 देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है, क्योंकि त्रिपुंड की तीन रेखाओं में 9-9 देवताओं का वास माना जाता है।

2. तिलक लगाने से बुरे विचारों से रक्षा होती है, मन शांत और संयमित रहता है।

3. व्यक्ति के व्यवहार में सौम्यता और गंभीरता आती है।

4. प्रतिदिन त्रिपुंड लगाने से जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है।

5. इसे महादेव के प्रसाद के रूप में धारण करने पर नकारात्मक शक्तियां पास भी नहीं आतीं।

6. व्यक्ति का मन धर्म, ध्यान और साधना की ओर प्रेरित होता है।

7. शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

विज्ञान की दृष्टि से त्रिपुंड के लाभ…

1. मस्तक पर त्रिपुंड लगाने से मस्तिष्क के मध्य भाग (Ajna Chakra) पर ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है।

2. यह तनाव, बेचैनी और क्रोध पर नियंत्रण में सहायक होता है।

3. त्रिपुंड से उत्पन्न ठंडक और खुशबू मानसिक स्पष्टता और फोकस बढ़ाती है।

4. भस्म में मौजूद औषधीय तत्व त्वचा और स्नायुओं के लिए भी लाभदायक होते हैं।

 

About the Author

Hema Gupta

Author

"मैं हेमा गुप्ता, पिछले 2 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं। एक क्रिएटिव और पैशनेट कंटेंट राइटर होने के साथ-साथ मैं ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी अनुभव रखती हूं। मेरा फोकस स्पोर्ट्स, एंटरटेनमेंट, सनातन संस्कृति और लाइफस्टाइल से जुड़ी खबरों पर रहता है। सटीकता, सरल भाषा और रोचकता मेरी लेखन शैली की खासियत है। चाहे डिजिटल प्लेटफॉर्म हो या ऑन-ग्राउंड रिपोर्टिंग, मेरा मकसद हमेशा ऑडियंस को सही और दिलचस्प जानकारी पहुंचाना है.

View All Posts

Post navigation

Previous:  स्कूलों को बम से उड़ाने की साज़िश: दिल्ली-बेंगलुरु में 80 से ज्यादा स्कूलों को धमकी
Next: सुप्रीम कोर्ट में याचिका: 500-500 के जले नोट, 55 गवाह और जस्टिस वर्मा की अपील

Related Stories

Holika Dahan 2026 Date
  • सनातन

Holika Dahan 2026 Date: क्या आप भी हैं कंफ्यूज? कब है होलिका दहन तो ये खबर आपके लिए…

Hema Gupta March 1, 2026
Pamchkuian Temple Mp
  • सनातन

Pamchkuian Temple Mp: ऐसा राम मंदिर जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में आते हैं तोते!

Hema Gupta February 28, 2026
Maa Saraswati Mandir
  • सनातन

Maa Saraswati Temple Mp: ऐसा मंदिर जहां माता का स्याही से किया जाता है अभिषेक!

Hema Gupta February 24, 2026
  • जनजातीय अंचल में पहली बार हो रही कृषि कैबिनेट : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
  • प्रदेश में शांति, सुरक्षा और सौहार्द सर्वोपरि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
  • वन्य-जीव संरक्षण और संवर्धन हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
  • प्रदेश के वन राज्य ही नहीं राष्ट्र की भी हैं बड़ी धरोहर : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
  • सफल वन्यजीव संरक्षण ने विश्व में बढ़ाई है मध्यप्रदेश की साख: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

You Know This

  • Contact Us
  • PRIVACY POLICY
  • DESCLAIMER
  • TERMS and CONDITION
  • About Us
  • क्या वित्तीय संतुलन को बरकरार रख पायेगा हरियाणा का बजट 2026-27?
  • भारत छठवीं बार T20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में, वेस्टइंडीज को पछाड़ा 5 विकेट से
  • जंतर मंतर रैली को CM भगवंत मान ने वर्चुअली किया संबोधित
  • 2  मार्च को बड़वानी में कृषि कैबिनेट: सीएम डॉ मोहन यादव छोड़ेंगे सौगातों की फुहार
  • हल्द्वानी में हाथी से टकराई बाइक, 2 सगे भाईयों की मौत
Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.