Toxic cough syrup for children : छिंदवाड़ा कफ सिरप मामले की जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है 2 और कफ सिरप बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं, क्योंकि इनमें 0.01 प्रतिशत से ज्यादा डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) पाया गया है.
छिंदवाड़ा कांड की गंभीरता
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप पीने से 11 से ज्यादा बच्चों की मौत हो गई थी. लैब रिपोर्ट में पता चला कि ‘कोल्ड्रिफ’ नामक सिरप में 48.6% डायएथिलीन ग्लाइकॉल मिला, जबकि दवा मानकों के अनुसार यह मात्रा 0.01 प्रतिशत से कम होनी चाहिए. DEG एक घातक रसायन है, जिसका सेवन बच्चों की किडनी फेलियर और मौत का कारण बन गया.
जांच में नया खुलासा
तमिलनाडु सरकार की रिपोर्ट में बताया गया कि कफ सिरप बनाने वाली कंपनी में 350 से ज्यादा कमियां पाई गई हैं. जांच में पाया गया कि सिर्फ कोल्ड्रिफ ही नहीं, बल्कि 2 और सिरप भी ऐसी गंभीर गड़बड़ियों के साथ बनाई गईं, जिनमें DEG की खतरनाक मात्रा मिलाई गई थी. प्रोपिलीन ग्लाइकॉल भी इंडस्ट्रियल ग्रेड का इस्तेमाल किया गया, जो बच्चों के लिए काफी हानिकारक है.दो और कफ सिरप री लाइफ और रेस्पिफ्रेस टीआर की रिपोर्ट में खतरनाक केमिकल डायएथिलीन ग्लाइकॉल की अधिक मात्रा पाई गई है। ये दोनों सिरप गुजरात में बनाए गए हैं।
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प्रशासन की कार्रवाई
मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस सिरप की बिक्री मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में प्रतिबंधित कर दी गई है. जिन डॉक्टरों ने यह दवा लिखी थी, उन्हें गिरफ्तार किया गया है और दवा कंपनी के खिलाफ FIR दर्ज हुई है. प्रदेश में कफ सिरप की रिटेलिंग और सैंपल की जांच के लिए ड्राइव चलाई जा रही है.
क्यों हैं DEG और प्रोपिलीन ग्लाइकॉल जानलेवा?
DEG और प्रोपिलीन ग्लाइकॉल भारी मात्रा में शरीर में जाएं तो किडनी, लीवर और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे मौत हो सकती है.
DEG का प्रयोग आमतौर पर औद्योगिक उत्पाद जैसे ब्रेक फ्लूड, एंटीफ्रिज आदि में होता है, और ये शरीर में पहुंचने पर घातक साबित हो सकता है.
छिंदवाड़ा में हुए इस मामले के बाद ना सिर्फ कोल्ड्रिफ, बल्कि 2 और कफ सिरप ब्रांड्स को भी बच्चों के लिए खतरे की लिस्ट में डाला गया है, और राज्य सरकार द्वारा टीम बनाकर जांच और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
