भोपाल मातृभाषा उत्सव: राजधानी भोपाल में आज से मातृभाषाओं का उत्सव शुरू होने जा रहा है। भेल स्थित दशहरा मैदान तीन दिनों तक भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगा रहेगा। मातृभाषा मंच के तत्वावधान में आयोजित यह तीन दिवसीय मातृभाषा समारोह आज शुभारंभ के साथ शुरू होकर 1 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक पकवानों के स्टॉल लोगों को आकर्षित करेंगे।
भोपाल मातृभाषा उत्सव: पहले दिन बच्चों और युवाओं पर फोकस
समारोह के पहले दिन सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक विद्यार्थियों के लिए विशेष गतिविधियां रखी गई हैं। इस दौरान राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रस्तुति और ‘वंदे मातरम’ पर आधारित नाटिका मंचित की जाएगी.शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक औपचारिक उद्घाटन समारोह होगा, जिसमें विभिन्न भाषायी समाजों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। यही सत्र समारोह का मुख्य आकर्षण माना जा रहा है।
भोपाल मातृभाषा उत्सव: दो दिन क्या रहेगा खास
31 जनवरी को गुरु तेग बहादुर के जीवन और बलिदान पर केंद्रित नाटिका का मंचन किया जाएगा। वहीं अंतिम दिन, 1 फरवरी को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक भगवान झूलेलाल और भगवान बिरसा मुंडा पर आधारित नाटिकाएं प्रस्तुत होंगी। इसी दिन शाम 6 बजे से ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा का भव्य मंचन किया जाएगा, जिसे लेकर खासा उत्साह है।
सबसे बड़ा संदेश
आयोजकों के अनुसार इस आयोजन में भोपाल के विभिन्न भाषायी परिवारों की सक्रिय सहभागिता रहेगी। इससे मातृभाषाओं की समृद्ध परंपरा, संस्कृति और भारतीय विचारधारा को एक साझा मंच मिलेगा।
समारोह में करीब 18 भाषायी परिवार अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल, सांस्कृतिक प्रदर्शनियां और लोककलाओं की झलक इस आयोजन को खास बनाएगी. तीन दिन तक चलने वाला यह आयोजन न सिर्फ भाषाओं का उत्सव होगा, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण भी पेश करेगा।
