इतिहास पुरानी सीमा विवाद फिर उभरा
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर लगातार दूसरे दिन भीषण फायरिंग जारी है। गुरुवार को शुरू हुआ संघर्ष शुक्रवार को भी गहराया, जिससे सीमा क्षेत्र में जीवन और संपत्ति दोनों प्रभावित हुए हैं।

थाईलैंड द्वारा आज तक 15 नागरिकों और 1 सैनिक की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि कंबोडिया में भी एक व्यक्ति की मौत हुई है। घायल लोगों की संख्या 46 से अधिक बताई गई है। दोनों देशों में अब तक लगभग 1 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं, और कंबोडिया ने 20,000 से अधिक निवासियों को भी अपनी सीमाओं से हटाया है।
गोलीबारी कहां से शुरू हुई?
संघर्ष की शुरुआत हुई थी प्राचीन शिव मंदिर ‘प्रासात ता मुएन थोम’ के विवादित क्षेत्र से। थाई सेना का आरोप है कि कंबोडियाई सैनिकों ने ड्रोन उड़ाकर थाई ठिकानों पर नजर रखी, जिसके जवाब में थाई ने वार्ता की कोशिश की, लेकिन विफल रहने पर सुबह 8:20 बजे भारी फायरिंग शुरू हो गई।
दोनों देशों द्वारा गनफायर व एयरस्ट्राइक
थाईलैंड ने हवाई हमलों में F‑16 जेट्स का उपयोग किया और सीमा पार स्थित कंबोडियाई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, कंबोडिया ने इसके जवाब में BM‑21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से थाईलैंड में कई स्थानों पर बमबारी की Sisaket और Surin प्रांतों में एक पेट्रोल स्टेशन पर रॉकेट गिरने से कई लोग मारे गए और घायल हुए
सुरक्षा एजेंसियों और यात्रा सलाह
थाई सीमा से लगे Ubon Ratchathani, Surin, Sisaket, Buriram, Sa Kaeo, Chanthaburi और Trat जिलों में भारतीय अधिकारियों ने यात्रा सलाह जारी की है। भारतीय दूतावास ने नागरिकों को इन इलाकों की यात्रा से बचने की चेतावनी दी है ।
118 साल पुराना सीमा विवाद
यह विवाद लंबे समय से चला आ रहा है, जिसका मूल कारण 1907 के उपनिवेशक द्वारा निर्धारित सीमा में प्रीह विहियर मंदिर है। 1962 में ICJ द्वारा मंदिर कंबोडिया को सौंपा गया, लेकिन आसपास की जमीन को लेकर तनाव जारी रहा। मासूम संबंध बिगड़े तब से कई बार दोनों देशों के बीच तनाव उभरा, लेकिन यह मौजूदा स्थिति 2011 के बाद सबसे बड़ा संघर्ष माना जा रहा है ।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ASEAN के अध्यक्ष मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम ने दोनों पक्षों से शांति वार्ता की अपील की है और मामले में मध्यस्थता की पेशकश की है । यूएन सुरक्षा परिषद जल्द ही इस संकट पर आपात बैठक करेगी। संयुक्त राज्य, चीन, फ्रांस, ईयू सहित कई देशों ने तुरंत संघर्ष समाप्त करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है
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