Terror network crackdown in J&K: जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने शनिवार को आतंकवाद और अलगाववादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। जम्मू-कश्मीर पुलिस, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) और काउंटर इंटेलिजेंस (CI) की संयुक्त टीमों ने राज्यभर में 120 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। इस अभियान में श्रीनगर की सेंट्रल जेल और कुपवाड़ा जिला जेल भी शामिल रही।
सूत्रों के अनुसार, यह छापेमारी उन 200 से अधिक संदिग्ध व्यक्तियों के ठिकानों पर की गई जो कश्मीर घाटी में पाकिस्तान में बैठे आतंकियों से संपर्क में थे। छापों के दौरान एजेंसियों ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल डिवाइस, बैंक दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री जब्त की है।
एजेंसियों का कहना है कि ये कार्रवाई खुफिया इनपुट के आधार पर की गई, जिसमें यह जानकारी मिली थी कि कुछ संदिग्ध लोग जेल में बंद आतंकियों और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में बैठे आतंकियों के संपर्क में हैं।

दो पुलिस अधिकारी बर्खास्त
इस कार्रवाई के बीच जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में दो पुलिस अधिकारियों को आतंकवादियों से संबंध रखने और मदद करने के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया है। बर्खास्त अधिकारियों की पहचान अब्दुल लतीफ और मोहम्मद अब्बास के रूप में हुई है।
पुलिस के मुताबिक, अब्दुल लतीफ आतंकियों के संपर्क में था और उन्हें सपोर्ट कर रहा था। उस पर मामला दर्ज कर लिया गया है और वर्तमान में वह डोडा जेल में बंद है। वहीं दूसरे अधिकारी मोहम्मद अब्बास के खिलाफ चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पुलिस बल में आतंक या अलगाववादी विचारधारा से जुड़े लोगों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो।

Terror network crackdown in J&K: जेलों से भी चल रहा था संपर्क
सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियों ने श्रीनगर सेंट्रल जेल और कुपवाड़ा जिला जेल में भी तलाशी ली।
यहां से डिजिटल सुबूत, नोट्स और फोन नंबरों की लिस्ट मिली हैं, जिनका आतंकियों के नेटवर्क से संबंध बताया जा रहा है।
छापेमारी के दौरान करीब दो दर्जन लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इनमें से कुछ लोग जेल में बंद आतंकियों और पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि कई संदिग्ध कश्मीर घाटी के बडगाम, कुलगाम और शोपियां जैसे इलाकों में सक्रिय थे। वे पाकिस्तान की ओर से चलाए जा रहे प्रोपेगेंडा नेटवर्क को भारत में फैलाने की कोशिश कर रहे थे।
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डिजिटल साक्ष्य फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे
एजेंसियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए सभी डिजिटल डिवाइस — जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और सिम कार्ड — को अब फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। इन उपकरणों का डिक्रिप्शन और डेटा माइनिंग किया जाएगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ये संदिग्ध सिर्फ संपर्क में थे या आतंकियों की भर्ती, फंडिंग या पनाह देने में भी शामिल थे।
साथ ही उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स, बैंक ट्रांजैक्शन, यात्रा रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की भी जांच की जाएगी। एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे आतंकी नेटवर्क के गहरे संबंधों और वित्तीय स्रोतों का खुलासा होगा।

खुफिया इनपुट से शुरू हुआ ऑपरेशन
Terror network crackdown in J&K: यह ऑपरेशन एक विशेष खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किया गया था। जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान में बैठे कुछ कश्मीरी आतंकवादी घाटी के भीतर अपने नेटवर्क को फिर से सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए वे सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के जरिए फंडिंग और भड़काऊ सामग्री फैला रहे थे।
एजेंसियों ने बताया कि कुछ संदिग्ध POK से डिजिटल माध्यमों पर निर्देश प्राप्त कर रहे थे, जिन्हें अब तकनीकी जांच के जरिये ट्रेस किया जा रहा है। अगर आगे नए सबूत मिलते हैं, तो अगले चरण में और छापे और गिरफ्तारियां भी की जा सकती हैं।
