इलाकों की सीमाओं को लेकर खून-खराबा सिर्फ इंसानों में नहीं बल्कि जानवरों में भी देखी जाती है. जानवर भी आत्मघाती कदम उठा लेते हैं. कुछ ऐसा ही नजारा सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व में देखने को मिला. जहां पर टेरिटरी को लेकर एक बाघ ने बाघिन को मौत के घाट उतार दिया.
टेरिटरी को लेकर बाघ और बाघिन में हुई खूनी जंग
पेंच टाइगर रिजर्व सिवनी के उपसंचालक रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि “कर्माझिरी परिक्षेत्र के स्थित कक्ष क्रमांक 585, अलीकट्टा घास मैदान के पास 2 मजदूरों को बाघों के लड़ने की आवाज सुनाई दी. वहीं थोड़ी देर बाद रोड के दूसरी ओर बाघों को लड़ते हुए देखा गया. एक बाघ को दूसरे बाघ के द्वारा खींचकर जंगल की ओर ले-जाते देखा. इसके बाद तुरंत इस बाद की जानकारी वरिष्ठ अधिकारी दी.”
बाघिन हार गई जंग
जिस जगह पर दोनों बाघ थे. वह झाडि़यों से घिरा हुआ था. दूर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और पैदल पास जाना घातक हो सकता था. इसलिए हाथियों की मदद से बाघों के पास जाने का निर्णय लिया गया. हाथियों के आते तक शाम हो चुकी थी. हाथियों पर सवार होकर पास जाकर देखने से पता चला कि, बाघिन की मौत हो चुकी है और दूसरा बाघ भी पास ही था. मौके पर कैमरा लगाकर बाघिन के शव को वहीं छोड़ दिया गया था, ताकि बाघ उसे लेने आए.
अक्सर टेरिटरी को लेकर होता है विवाद
बाघ जब बड़े हो जाते हैं, तो वह अपना इलाका तय करते हैं. वह इलाका केमिकल सिग्नेचर से तय करते हैं या फिर पेड़ों पर पंजे के निशान लगाकर यह बताते हैं कि यहां पर और कोई दूसरा जानवर इंटरफेयर ना करे. शायद इसी बात को लेकर मादा बाघिन अपना इलाका बना रही होगी, लेकिन वह बाघ की टेरिटरी के अंतर्गत रहा होगा और दोनों में इसी को लेकर झड़प हुई होगी.
