
Bhanpura: 17 सितम्बर को नगर परिषद भानपुरा द्वारा पुर्व में शांति समिती कि बेठक में लिए गए निर्णय अनुसार गणेश प्रतिमाओ का विसर्जन एक साथ नगर परिषद के तत्वावधान में करना था उसी के तहत 17 सितम्बर को स्थापित प्रतिमाए बस स्टैंड पर लाई गई प्रशासन व नगर परिषद कि देख रेख में जो स्थान तय किए वहां प्रतिमाओं को विसर्जित करना था पर नगर परिषद के कर्मचारी व ट्रेक्टर चालक संजय पंचोली ने उन प्रतिमाओं को नगर के समीप रेवा नदी के एक गन्दे नाले में विसर्जित कर दिया आज सुबह जब मुर्तियो को आमजन में गन्दे नाले में पढ़ें देखा तो फोटो व वीडियो वायरल होने लगे नगर में इस घटना को लेकर तनाव बढ़ गया ओर हिन्दू संगठनों के आव्हान पर नगर बंद हो गया रेवा नदी किनारे भारी भीड़ जुट गई नारेबाजी करने लगे ओर नगर पालिका अधिकारी को व दोषी कर्मचारी पर कार्रवाई करने व नोकरी से हटाने कि मांग कि घटना कि स्थिती को देखते हुए एस डी एम चंदरसिंह सोलंकी,एस डी ओ पी राजाराम धाकड़,थाना प्रभारी रोहित कछावा, तहसीलदार विनोद शर्मा घटना स्थल पहुंचे व हिन्दु संगठनों के सदस्यों व पदाधिकारियों से बातचीत कि महंत प्रकाशनाथ जी सनातन धर्म मण्डल अध्यक्ष भुपेंद्र सोनी पुर्व अध्यक्ष लालचंद रुद्रवाल, समरसता मंच के पवन उपाध्याय नगर परिषद नेता प्रतिपक्ष श्रीनाथ उपाध्याय, डा आनंद जैन, जितेन्द्र पुरोहित,बन्टी गुर्जर,सनातन धर्म मण्डल युवा अध्यक्ष दिव्यांशु भाना, संतोष पाटीदार, अनिल राठोर,, मण्डल भाजपा महामंत्री प्रवेश परिहार सहित अनेक सदस्यों ने प्रशासन व पुलिस अधिकारियों से बातचीत कि पर आक्रोशित भीड़ कि यह मांग समाचार लिखे जाने तक यह थी कि नगर पालिका अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी मांगे ओर प्रकरण दर्ज हो ओर नोकरी से हटाया जाए,नगर पालिका अधिकारी ने दोषी कर्मचारी संजय पंचोली को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, घटना को लेकर हिन्दू संगठनों के कार्यक्रता लगातार नारेबाजी करते रहे बस स्टैंड पर विजय स्तंभ के समीप शाम तक भीड़ रही ओर आखिर तक अपनी मांग पर अढे रहे, उल्लेखनीय है कि जिस जगह प्रतिमाए डाली गई वह नगर का गन्दा नाला गिरता है खुले में शोच जाने वाले उसी जगह पानी का उपयोग करते हे ऐसे में धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ हे नगर पालिका अधिकारी व प्रशासन ने जब नियत स्थान तय किया था तो कर्मचारी ने दुसरी जगह मुर्तियां क्यों विसर्जित किया इतने संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन व नगर पालिका अधिकारी ने केवल आदेश दे दिया ओर यह देखने कि कोशिश क्यों नहीं कि कि प्रतिमाएं सही जगह विसर्जित कि गई या नहीं प्रतिमाएं गलत व गन्दी जगह पर डालने के लिए कर्मचारी के साथ अधिकारी भी दोषी हे एक बात ओर यह हे कि वर्षों से यह परम्परा रही कि स्थापित प्रतिमाए जिन्होंने स्थापित कि वह ही विधी विधान से विसर्जित करें ओर अगर यह परम्परा कायम रहती तो यह विवाद उत्पन्न नहीं होता समाचार लिखे जाने तक नगर बन्द था प्रतिमाएं रेवा नदी नाले में ही थी । आक्रोशित जनता की माग को देखते हुए अनुविभागीय अधिकारी द्वारा कलेक्टर महोदय को मुख्य नगर पालिका अधिकारी को निलंबित हेतु एक आवेदन भेजा गया
