शिर्डी के सांईं बाबा के जीवन के अनेक चमत्कारिक किस्से हैं जो भक्तों के बीच श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक बने हुए हैं। यहाँ हम केवल दस प्रमुख चमत्कारिक घटनाओं की चर्चा करेंगे, जो बाबा की दिव्यता और करामात को दर्शाती हैं। हो सकता है कि इनमें से कुछ महत्वपूर्ण किस्से छूट गए हों।
पहली कहानी: सांईं बाबा प्रतिदिन मस्जिद में दीया जलाते थे। एक दिन जब बनियों ने तेल देने से इनकार कर दिया, तो बाबा ने पानी डालकर दीया जलाया। यह चमत्कार चारों ओर फैल गया। बाद में बनियों ने बाबा से माफी मांगी, जिसे बाबा ने स्वीकार किया और झूठ बोलने से मना किया।
दूसरी कहानी: एक भक्त अपनी पत्नी के साथ दूर से बाबा के दर्शन के लिए आया। जब बारिश शुरू हो गई, तो बाबा ने प्रार्थना की और बारिश तुरंत रुक गई, जिससे भक्त सुरक्षित घर लौट सके।
तीसरी कहानी: एक बार एक बच्ची गांव के कुएँ में गिर गई। सभी ने देखा कि वह हवा में लटकी हुई थी। यह चमत्कार बाबा के द्वारा किया गया था, क्योंकि बच्ची ने कहा कि वह बाबा की बहन है।
चौथी कहानी: म्हालसापति ने बाबा से अपने पुत्र का नामकरण कराने को कहा। बाबा ने कहा कि पुत्र के साथ अधिक आसक्ति मत रखो, केवल 25 साल तक ध्यान रखो। 25 साल की उम्र में पुत्र का निधन हुआ, और यह बाबा की भविष्यवाणी सही साबित हुई।
पांचवीं कहानी: बाबा ने म्हालसापति को 3 दिन तक अपने शरीर की रक्षा करने के लिए कहा। हालांकि डॉक्टरों ने बाबा की मृत्यु मान ली थी, पर म्हालसापति ने 3 दिन तक जागरण किया। इसके बाद बाबा ने पुनः शरीर धारण किया और चमत्कार हुआ।
छठी कहानी: काका महाजनी ने शिर्डी में एक सप्ताह बिताने का निर्णय लिया। बाबा ने उन्हें कहा कि अगले दिन ही लौटें। जब काका मुंबई पहुंचे, तो पता चला कि उनकी उपस्थिति अनिवार्य थी क्योंकि उनके ऑफिस के मुनीम अस्वस्थ हो गए थे।
सातवीं कहानी: बाबा के हाथ जल गए थे और भागोजी शिंदे ने उनका इलाज किया, जो खुद कुष्ठ रोगी थे। बाबा ने एक डॉक्टर को इलाज से इंकार कर दिया और शिंदे के इलाज से ठीक हो गए।
आठवीं कहानी: धुमाल ने शिर्डी में बाबा से दर्शन के बाद जाने का प्रयास किया, लेकिन बाबा ने उन्हें एक सप्ताह और रुकने को कहा। इसी दौरान निफाड़ के न्यायाधीश बीमार हो गए, जिससे मुकदमे की तारीख आगे बढ़ गई। धुमाल ने अंततः मुकदमा जीत लिया।
नौवीं कहानी: मुले शास्त्री ने बाबा के हाथ की परीक्षा करने की कोशिश की, लेकिन बाबा ने उन्हें केले दिए। बाद में, मुले ने देखा कि बाबा की जगह उनके गुरु दिख रहे थे, जिससे उनका संशय दूर हो गया।
दसवीं कहानी: एक डॉक्टर ने शिर्डी में बाबा के दर्शन को जाने से मना किया, लेकिन मित्र के साथ जाने पर बाबा के दर्शन किए और उन्हें अपने प्रिय ईष्ट श्रीराम के दर्शन हुए। डॉक्टर ने बाबा की दिव्यता को स्वीकार किया और वहां स्थिर हो गए।
इन चमत्कारिक घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सांईं बाबा की कृपा और दिव्यता ने न केवल उनके भक्तों को चमत्कृत किया बल्कि उनके जीवन में अद्वितीय स्थिरता और विश्वास भी प्रदान किया।
