तेलंगाना में प्रतिबंधित माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। संगठन के दो नक्सली कमांडेट और 6 करोड़ के इनामी मल्ला राजिरेड्डी ने हथियार डाल दिए हैं। दोनों ने राज्य की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के सामने सरेंडर किया। सुरक्षा एजेंसियां इसे लंबे समय से चल रही रणनीतिक कार्रवाई का नतीजा मान रही हैं।
सेंट्रल कमेटी से पोलित ब्यूरो तक, बड़े चेहरों की एंट्री
देवजी संगठन की सेंट्रल कमेटी में अहम भूमिका निभा रहे थे, जबकि मल्ला राजिरेड्डी माओवादी पोलित ब्यूरो के सदस्य रहे हैं। दोनों लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर थे। अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि देवजी को शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और वह सीनियर मोस्ट वांटेड चेहरों में शामिल था।
डिप्टी सीएम का दावा “लड़ाई अब आखिरी दौर में”
राज्य के डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि यह बेहद बड़ी सफलता है। उनके मुताबिक कुछ और नक्सली निष्क्रिय हो चुके हैं और उन्हें भी जल्द आत्मसमर्पण के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार का दावा है कि अभियान निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
करेगुट्टा में दबाव बढ़ा, 89 IED बरामद
करेगुट्टा क्षेत्र में चल रहे ऑपरेशन को भी इस सफलता से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रशासन के अनुसार अब तक 89 IED मौके से हटाए जा चुके हैं। यह इलाका लंबे समय से नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता था। अधिकारियों का कहना है कि अब वहां की पकड़ ढीली पड़ रही है।
पुनर्वास की पेशकश, नेटवर्क पर सख्ती जारी
सरेंडर के बाद रणनीति दोहरी रखी गई है जो मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास का रास्ता खुला है; जबकि सक्रिय नेटवर्क पर दबाव लगातार बढ़ाया जाएगा। सरकार 31 मार्च तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य दोहरा चुकी है।
संगठन पर असर कितना गहरा?
देवजी और मल्ला राजिरेड्डी जैसे बड़े नामों का सरेंडर संगठनात्मक ढांचे में खालीपन पैदा करेगा। इससे जमीनी स्तर पर चल रहे अभियानों को गति मिल सकती है। अब देखना होगा कि बाकी शीर्ष कैडर क्या रुख अपनाते हैं।
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