telangana pharma factory blast operation: हादसे में जली हड्डियां, अंग बरामद, 6 दिन बाद भी लापता 8 लोगों की तलाश जारी
telangana pharma factory blast operation: तेलंगाना के पाशमिलारम इंडस्ट्रियल एरिया में 30 जून को हुए फार्मा फैक्ट्री विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस भीषण हादसे में मरने वालों की संख्या 42 तक पहुंच चुकी है। घटना के छह दिन बाद भी 8 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। राहत व बचाव दल लगातार घटनास्थल पर DNA टेस्टिंग और सर्च ऑपरेशन में जुटा है।

DNA से हुई एक और शव की पहचान
रविवार को एक और व्यक्ति की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एक शव की पहचान DNA जांच से की गई। प्रशासन का कहना है कि घटनास्थल से मिली हड्डियां और जले अंगों की पहचान के लिए सैंपल जांचे जा रहे हैं। यदि ये अवशेष लापता लोगों से मेल खाते हैं, तो आंकड़ा और स्पष्ट हो सकेगा।
हादसे की भयावहता: कैसे हुआ सबकुछ
यह धमाका 30 जून की सुबह 8:15 से 9:30 बजे के बीच हुआ था। सिगाची इंडस्ट्रीज नामक इस फार्मा यूनिट में उस समय लगभग 150 लोग मौजूद थे, जिनमें से ब्लास्ट की जगह करीब 90 मजदूर काम कर रहे थे।
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विस्फोट इतना जोरदार था कि 31 शव मौके पर ही बरामद किए गए थे।
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कई मजदूर 20% से लेकर 50% तक जल गए थे, जिनका इलाज अभी भी चल रहा है।
राहत और मुआवजा: केंद्र और कंपनी की ओर से घोषणा
PM मोदी की घोषणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PM नेशनल रिलीफ फंड से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की मदद की घोषणा की है।
कंपनी द्वारा राहत पैकेज
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मृतकों के परिजन को ₹1 करोड़ का मुआवजा
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गंभीर रूप से घायलों को ₹10 लाख
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अन्य घायलों को ₹5 लाख
यह मुआवजा राहत जरूर देता है, लेकिन जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई असंभव है।

हादसे से जुड़े दिल दहला देने वाले दृश्य
धमाके के बाद फैक्ट्री के भीतर का नज़ारा युद्ध क्षेत्र जैसा था।
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शव अधजले हाल में मिले
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फ्लोर पर बिखरे अंग और हड्डियां
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फैक्ट्री से कई मजदूरों को बाहर निकालते वक्त वे पूरी तरह झुलस चुके थे
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कुछ मजदूरों के बारे में केवल DNA टेस्ट से ही जानकारी मिल रही है
लापता 8 की तलाश अब भी जारी
6 दिन बीत जाने के बाद भी 8 लोग लापता हैं।
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NDRF और SDRF की टीमें घटनास्थल की हर परत को खंगाल रही हैं
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DNA प्रोफाइलिंग और फॉरेंसिक जांच से मदद ली जा रही है
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अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने में कुछ और दिन लग सकते हैं
जांच और जिम्मेदारी
इस हादसे ने सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े किए हैं:
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क्या फैक्ट्री में सुरक्षा उपाय पर्याप्त थे?
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रसायनों के भंडारण और कामगारों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही हुई?
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क्या यह हादसा मानव त्रुटि, तकनीकी खामी या लापरवाही का नतीजा था?

राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है।
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