tejashwi voter list 2025: तेजस्वी बोले- मेरा वोटर ID गायब! DM बोले, यह रहे 416 नंबर पर साहब!
tejashwi voter list 2025: पटना, 2 अगस्त 2025 बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार को बड़ा आरोप लगाया कि उनका और उनकी पत्नी का नाम मतदाता सूची से गायब है। उन्होंने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद का EPIC नंबर डालकर LIVE डेमो दिखाया और कहा NO RECORDS FOUND लिखा आ रहा है।

लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब पटना DM एस.एन. त्यागराजन ने तेजस्वी के दावे को खारिज कर दिया और बूथ लिस्ट जारी कर दी, जिसमें तेजस्वी का नाम क्रम संख्या 416 पर दर्ज था।
EPIC कार्ड बनाम ऑफिसियल वोटर लिस्ट किसकी बात सच?
DM ने बताया कि तेजस्वी का नाम पहले बूथ 171 पर था, अब बूथ 204 में शिफ्ट कर दिया गया है।
तेजस्वी के तीखे आरोप EC गोदी आयोग बन चुका है
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिना जानकारी के 65 लाख लोगों के नाम काट दिए गए, हर विधानसभा से 20-30 हजार नाम हटे हैं EC की सूची में न तो पता है, न नोटिस दिया गया 2 गुजराती जो कहेंगे, वही चुनाव आयोग करेगा उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार गुप्ता को चुनौती दी कि वो बताए कि किन लोगों के नाम कटे और क्यों।
चुनाव आयोग की सफाई क्यों कटे 65 लाख नाम?
| वजह | वोटर |
|---|---|
| निधन | 22.34 लाख |
| दूसरी जगह शिफ्ट | 36.28 लाख |
| दोहरी एंट्री | 7.01 लाख |
| कुल | 65.64 लाख |
आयोग ने ये भी बताया कि ये आंकड़े ड्राफ्ट लिस्ट से हैं, अंतिम सूची में संशोधन संभव है।
कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित?
| ज़िला | नाम कटे |
|---|---|
| पटना | 3.95 लाख |
| दरभंगा | 2.85 लाख |
| किशनगंज (मुस्लिम बहुल) | 49,340 (1 विधानसभा) |
| कटिहार, पूर्णिया, अररिया | लाखों नाम कटे |
तेजस्वी का आरोप है कि मुस्लिम बहुल और महागठबंधन समर्थित इलाकों को टारगेट किया गया।
EPIC नंबर से NO RECORD क्यों?
विशेषज्ञों का मानना है कि EPIC नंबर से खोज अस्थायी अपडेट के कारण विफल हो सकती है तकनीकी गड़बड़ी के चलते backend sync delay संभव है नाम ड्राफ्ट लिस्ट में हो, लेकिन डाटा अपडेट न हो ये भी एक कारण

चुनाव आयोग से तेजस्वी की मांग
बूथ-वाइज नाम कटने की लिस्ट जारी करें नाम हटाने की वजह बताई जाए राजनीतिक दलों को बदलाव की सूचना पहले दी जाए सुप्रीम कोर्ट स्वतः संज्ञान ले तेजस्वी यादव का दावा चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भारी अविश्वास को दिखाता है, लेकिन DM का जवाब तकनीकी और प्रक्रिया आधारित प्रतीत होता है। अगर सच में 65 लाख नाम बिना सूचना के हटाए गए, तो यह चुनावी पारदर्शिता पर बड़ा सवाल है।
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