
जब आसमान में तेजस गरजा, तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया
Tejas Mark-1A Takes Off: कुछ पल ऐसे होते हैं जो इतिहास में दर्ज हो जाते हैं और 18 अक्टूबर 2025 का दिन ऐसा ही था। नासिक के ओझर में HAL की नई यूनिट से स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1A ने पहली बार उड़ान भरी, और एक नई कहानी शुरू हुई – आत्मनिर्भर भारत की।
इस उड़ान का सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि भावनात्मक महत्व भी है। क्योंकि ये सिर्फ एक फाइटर जेट नहीं, भारत की इंजीनियरिंग, साहस और आत्मनिर्भरता का उड़ता हुआ प्रतीक है।
Tejas Mark-1A Takes Off: रक्षा मंत्री ने दिखाई हरी झंडी, अब हर साल बनेंगे 8 तेजस
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नासिक में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की तीसरी प्रोडक्शन लाइन का उद्घाटन किया। यहां हर साल 8 तेजस फाइटर जेट तैयार किए जाएंगे, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाकर 10 तक किया जा सकता है। यह यूनिट भारतीय वायुसेना को 2032-33 तक 180 तेजस देने के लक्ष्य को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगी।
इस यूनिट से जो पहला विमान तैयार हुआ, उसने 18 अक्टूबर को सफल उड़ान भरी। इसे ‘वॉटर कैनन सैल्यूट’ देकर सम्मानित किया गया एक सच्चा सैनिक अपने देश के लिए तैयार हुआ।
Tejas Mark-1A Takes Off: क्या खास है तेजस मार्क-1A में?
- यह चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान है।
- रफ्तार 2,205 किमी/घंटा है, यानी ध्वनि से करीब दोगुनी तेज।
- इसके विंग्स में 9 जगह हथियार फिट किए जा सकते हैं।
- इसमें अपग्रेडेड एवियॉनिक्स, एडवांस रडार सिस्टम और सेल्फ डिफेंस शील्ड शामिल हैं।
- सबसे बड़ी बात इसके 65% से ज्यादा उपकरण भारत में बने हैं।
Tejas Mark-1A Takes Off: अब पाकिस्तान बॉर्डर के पास होगी तैनाती
तेजस को राजस्थान के बीकानेर के नाल एयरबेस पर तैनात किया जाएगा। यानी दुश्मन अब सिर्फ सीमा पर नहीं, आसमान में भी भारत की ताकत को महसूस करेगा। सरकार ने 62,370 करोड़ की डील के तहत 97 तेजस की खरीद को मंजूरी दी है।
Tejas Mark-1A Takes Off: मिग-21 का उत्तराधिकारी, एक नए युग की शुरुआत
तेजस मार्क-1A, वायुसेना के पुराने मिग-21 फ्लीट की जगह लेगा, जो हाल ही में रिटायर हुआ है। मिग-21 ने 62 सालों तक देश की सेवा की 1971 युद्ध, कारगिल ऑपरेशन, और कई मिशनों में अहम भूमिका निभाई। अब उसकी जगह ले रहा है एक स्वदेशी, आधुनिक और ज़मीन से जुड़ा फाइटर जेट – तेजस।
Tejas Mark-1A Takes Off: तेजस सिर्फ एक एयरक्राफ्ट नहीं, भारत का सपना है
तेजस को DRDO और ADA ने मिलकर विकसित किया, और इसके निर्माण में 500 से ज्यादा भारतीय कंपनियां शामिल हैं। यानी ये सिर्फ HAL की जीत नहीं, पूरे भारत की जीत है। हर उस इंजीनियर, टेक्नीशियन और वैज्ञानिक की मेहनत है, जो दिन-रात देश को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं।
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