Tariff War Economic Shutdown and Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द ही दवाइयों पर भारी टैरिफ लगाने जा रहे हैं। ट्रम्प का मकसद विदेश में दवा बना रही कंपनियों को अमेरिका में वापस लाना और घरेलू दवा इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है।
ब्लैक मंडे, टेरिफ वॉर, ये शब्द अब तक आपने सोशल मीडिया पर सुन ही लिए होंगे। और जो शेयर मार्केट में इंवेस्ट करते है उनको तो भारी नुकसान हुआ। 7 अप्रैल को सुबह जैसे ही मार्केट खुला। साल की दूसरी सबसे बड़ी गिरावट आई। इसके कारण निवेशकों के करीब 19 लाख करोड़ रुपए डूब गए। जापान, हॉन्गकॉन्ग समेत अन्य एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट देखी गई है।
#blackmonday हुआ वायरल
सोशल मीडिया पर #ब्लैक मंडे वायरल होने लगा। वैश्विक स्तर पर मंदी की आशंका, अमेरिका चीन के बीच टैरिफ युद्ध और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार को झकझोर दिया। सेंसेक्स करीब 4000 अंक गिरकर 71,425 तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 1,160 अंक टूटकर 21,743 पर आ गया।
लेकिन ऐसा क्यों हुआ ? कितने देशों में शेयर मार्केट गिरा ? और क्या इससे आर्थिक मंदी यानी की Economic Shutdown क्यों हो सकता है ?…इन सबसे पहले ये जान लिजीए की Black Monday क्या है।
1987 में हुआ था पहला Black Monday
19 अक्टूबर 1987 को अमेरिका के शेयर बाजार डॉव जोंस में सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट दर्ज की गयी थी। उस वक्त 22.6% गिरावट आयी थी। उस दिन सोमवार था और शेयर बाजार में एक दिन में इतने बड़े नुकसान को देखते हुए इसे ब्लैक मंडे कहा गया। इस गिरावट का असर सिर्फ अमेरिका तक ही नहीं था। इससे यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में भी तहलका मचाया। इसे पहला वैश्विक शेयर बाजार संकट भी कहा जाता है।
इस घटना ने Share Market में ट्रेडिंग के पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया था। इसलिए इसके बाद से सर्किट ब्रेकर जैसे नियम लागू किये गये। सर्किट ब्रेकर स्टॉक एक्सचेंजेस पर घबराहट में होने वाली बिक्री को रोकने के लिए व्यापार को रोकते हैं। अब इतने सालों बाद फिर से ब्लैक मंडे आया। और मार्केट को स्वाहा कर दिया।
Tariff War Economic Shutdown and Trump: मार्केट हुआ लहूलुहान
भारतीय मार्केट की बात करे तो BSE Sensex और NSE Nifty 9 महीने के निचले स्तर पर रह गए। Nifty 50 742.85 अंक गिरकर 22,161.60 पर जबकि Sensex 2,226 पॉइन्ट गिरकर 73,137 पर बंद हुआ।
कई दिग्गज शेयरों में भी भारी गिरावट आई। टाटा स्टील 8.08% की भारी गिरावट के साथ नुकसान करने वालों में सबसे आगे रही, उसके बाद L and T 6.56%, TATA Motors 5.70%, जबकि कोटक बैंक और इंफोसिस 4.92% और 4.44% गिर गए। लेकिन इस Selling out के बीच, हिंदुस्तान यूनिलीवर 0.16% की बढ़त के साथ इकलौते फायदे कमाने वाले शेयर के रूप में सामने आया।
किस देश में कितना मार्केट गिरा ?
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते व्यापार युद्ध और वैश्विक मंदी के डर ने निवेशकों को बुरी तरह से डरा दिया.
हांगकांग का बाजार सबसे ज्यादा -13.6% टूटा है. ताइवान और जापान के बाजारों में भी 9% से ज्यादा की भारी गिरावट रही. सिंगापुर में -8%, स्वीडन, चीन, स्विट्जरलैंड में -7%, यूरोप के बड़े देश जैसे इटली, जर्मनी, फ्रांस और स्पेन भी 6-8% तक गिरे. UK में -5.2%, और भारत में भी 4.1% की गिरावट आई, जो एशियाई देशों के मुकाबले कुछ हद तक कम रही.
मार्केट गिरने पर ट्रंप ने कहा –
कभी-कभी किसी चीज को ठीक करने के लिए दवा लेनी ही पड़ती है. ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी. लेकिन फिलहाल इन्वेस्टर्स को सिर्फ नुकसान ही दिख रहा है.
ऐसा भी क्या हुआ की बाजार इतना लहुलूहान हो गया ?
अमेरिका चीन व्यापार युद्ध चीन ने 10 अप्रैल से अमेरिकी आयात पर 34% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिसके जवाब में अमेरिका ने उतना ही टैरिफ लागू कर दिया।
आसान भाषा में समझे तो, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की..कि अमेरिका में अगर कोई सामान किसी दूसरे देश से आ रहे है तो उस पर कस्टम ड्यूटी अमेरिका उतनी ही लगाएगा जितना सामने वाला देश लगा रहा है, जैसे अगर भारत में बने सामान पर भारत 100 रू. कस्टम ड्यूटी लगा रहा है, तो अमेरिका भी उतनी ही भारत पर लगाएगा। पहले ऐसा कुछ भी नहीं था, लेकिन अमेरिका चीन व्यापार युद्ध में ट्रंप मे टैरिफ वॉर शुरू कर दिया. इससे Global Market में भय का माहौल बन गया।
इसका दूसरा कारण है। वैश्विक मंदी की आशंका: रिलायंस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विकास जैन ने कहा, “चीन और जापान के आंकड़े 10% और 8% टूटे। यह आने वाली वैश्विक मंदी के संकेत हैं।”
आखिर वैश्विक या आर्थिक मंदी क्या है ?
मंदी यानी किसी भी चीज का लंबे समय के लिए सुस्त पड़ जाना। जब किसी देश की Economy बढ़ने की बजाय लगातार दो-तीन तिमाही में घटने लगे तो इसे आर्थिक मंदी कहा जाता है।
किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी सामानों और सेवाओं की कुल वैल्यू को GDP कहते हैं। लेकिन जब GDP के आंकड़े घटने लगें तो देश में मंदी के बादल मंडराने लगते हैं।
मंदी की कंडिशन में महंगाई और बेरोजगारी तेजी से बढ़ती है। लोगों की आमदनी कम होने लगती है। शेयर बाजार में लगातार गिरावट दर्ज की जाती है, क्योंकि निवेशक पैसे लगाने से डरते हैं। लेकिन Economy एक क्वार्टर में गिरे, दूसरे में बढ़ने लगे और तीसरे में फिर गिर जाए तो इसे मंदी नहीं कहेंगे।
अगला कारण है विदेशी निवेशकों की बिकवाली – FII ने भारतीय बाजार से 3483.98 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
आर्थिक मंदी से आम लोगों पर क्या असर होता है ?
किसी भी देश के मंदी की चपेट में आने के कई खतरनाक नतीजे हो सकते हैं। Investment का माहौल बिगड़ सकता है। उपभोग और खरीद-बिक्री में कमी से कई कंपनियां बंद हो सकती हैं। इससे नौकरियां कम हो जाएंगी, तो लोग बेरोजगार होंगे। आम लोग और कारोबारी आमदनी घटने से कर्ज नहीं चुका पाएंगे और बहुत से लोग दिवालिया भी हो सकते हैं।
क्या अमेरिका में आएगी मंदी ?
अमेरिका के चलाए गए टैरिफ वॉर से केवल बाकी देशों को ही नहीं बल्कि अमेरिका में भी मंदी आ सकती है। जब कोरोना आया था तो लगभग सभी देशों का मार्केट गिर गया। अनुमान लगाया गया था कि अमेरिका में मंदी आएगी, लेकिन उस वक्त ऐसा कुछ हुआ नहीं…ढाई साल हो गए है…लेकिन अब अमेरिका के हालात बिगड़ने शुरू हो गए हैं। इसके 3 Signal सामने आए –
- बेरोजगारी
- कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स नीचे गिरना
- फाइनेंशियल सर्विस कंपनी जेपी मॉर्गन के सीनियर इकोनॉमिस्ट्स ने अमेरिका में मंदी आने की संभावना को 40% कर दिया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 के आखिर तक अमेरिका में मंदी आ सकती है।
ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने कहा – ग्लोबलाइजेशन और फ्री ट्रेड का दौर अब खत्म हो चुका है। अब दुनिया एक नए युग में जा रही है, जो खतरनाक होने वाला है। इस मुश्किल वक्त का सामना करने के लिए तैयार हो जाइए।
सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने चेतावनी दी कि – टैरिफ से वर्ल्ड इकोनॉमी को नुकसान पहुंच सकता है और यह एक बड़े ट्रेड वॉर को जन्म दे सकता है। उनका मानना है कि इससे सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा और आर्थिक अस्थिरता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी कहा कि टैरिफ समस्या का सिंगापुर जैसे छोटे और व्यापार पर निर्भर देशों पर ज्यादा असर पड़ेगा।
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
अमेरिका में अगर मंदी आई तो इससे दुनिया पर भी असर पड़ेगा। क्योंकि अमेरिका, दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी है। उसके तार पूरी दुनिया से जुड़े हैं। अगर अमेरिका मंदी की चपेट में आएगा तो दुनिया के बड़े हिस्से का प्रभावित होना तय है। इसका अनुमान इससे लगा सकते है कि अभी केवल अमेरिका में मंदी का अनुमान लगाया गया था जिससे ही भारत समेत एशियाई शेयर बाजार धड़ाम से गिर गए।
अमेरिका में मंदी आई तो भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा ?
Tariff War Economic Shutdown and Trump: अमेरिका में अगर मंदी आई तो हमारा एक्सपोर्ट भी प्रभावित होगा। हमारी डिमांड कम हो जाएगी। भारत की Economy में भी कमजोरी आएगी। इसका असर हमारी बचत पर पड़ेगा। हालांकि अगर हमारी अर्थव्यवस्था अपनी डिमांड को मेनटेन रखें। खासतौर से गरीबों की डिमांड चलती रहे तो मंदी का असर कम होगा।
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मार्केट में गिरावट का असर भी देखने को मिला केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 2-2 रुपए उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें 8 अप्रैल से लागू हो गई है।
मार्केट गिरने से सोने चांदी की कीमतों पर भी असर पड़ा
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की MP शाखा के मुताबिक, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम के भाव में 2,613 रुपए की गिरावट आई। इस हिसाब से सोने के दाम गिरकर 88,401 पर आ गए हैं। , इससे पहले एमपी के सराफा बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत 91,014 रुपए थी।
यही नहीं, चांदी के दाम भी गिर गए। एक किलो चांदी की कीमत में 4,535 रुपए की गिरावट आई है, जिसके चलते अब 1 किलो चांदी की कीमत 88,375 रुपए हो गई है। इससे पहले चांदी का भाव 92,910 प्रति किलो रुपए था। वहीं, 28 मार्च को चांदी के भाव 1,00,934 और 3 अप्रैल को सोने ने 91,205 का ऑल टाइम हाई का रिकॉर्ड बनाया था।
अनुमान लगाया जा रहा है कि सोने और चांदी के दाम और घट सकते है। एक रिपोर्ट की माने तो सोना 56000 रू. तक आ सकता है।
मार्केट गिरने से चंद मिनटो में भारत को करीब 19 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है…
90 दिनों के लिए हो सकता है टैरिफ स्थगित
सूत्रों के मुताबिक ये अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रंप 90 दिनों के लिए चीन को छेड़कर टैरिफ स्थगित कर सकते है…लेकिन बाद में व्हाइट हाउस ने इस बयान को ‘फेक न्यूज़’ कह दिया, जिससे शेयर मार्केट फिर से गिरने लगे.
यूरोपीय संघ (EU) अभी इस बात पर एकमत नहीं है कि अमेरिका के खिलाफ कितनी सख्ती दिखानी चाहिए. लेकिन उसने कहा है कि वह बातचीत के लिए तैयार है और जरूरत पड़ी तो जवाब भी देगा. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बताया कि EU ने अमेरिका को एक प्रस्ताव दिया है, जिसमें औद्योगिक सामानों पर दोनों तरफ से जीरो टैक्स गाने की बात कही गई है.
Tariff War Economic Shutdown and Trump: आगे क्या होगा ?
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते टैरिफ युद्ध से Global Inflation और विकास दर प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि रिस्क मैनेजमेंट के साथ निवेश करें और फिलहाल डिफेंसिव सेक्टर जैसे FMCG, फार्मा पर ध्यान दें।Edelweiss की राधिका गुप्ता ने सलाह दी कि अपने पास इमरजेंसी फंड रखें, शांत रहें और आगे बढ़ें।
