Surrendered Maoist Bhupati : कुख्यात नक्सली कमांडर मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति ने 60 साथियों के साथ महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में आत्मसमर्पण किया। भूपति ने स्पष्ट किया कि वह गद्दार नहीं हैं, बल्कि समय और परिस्थितियों के कारण हथियार डालने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने साथियों से अपील की है कि वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट आएं और जनता के बीच काम करें।
हालात बदलने का हवाला
भूपति ने स्वीकार किया कि लंबे समय तक सशस्त्र संघर्ष के कारण नक्सलियों और जनता के बीच दूरी बढ़ गई थी। उन्होंने माना कि हिंसा से आंदोलन कमजोर हुआ और इसका जनता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। इसलिए उन्होंने बदलाव को स्वीकार करते हुए शांति और विकास की दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया।
जनता से जुड़े रहने का आग्रह
भूपति ने वीडियो संदेश में अपने पूर्व साथियों से निवेदन किया कि वे हथियार डालकर लोगों के बीच लौटें और विकास के मार्ग पर चलें। उन्होंने मोबाइल नंबर भी साझा किए जिससे जो भी नक्सली आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, वे उनसे संपर्क कर सकें।
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व्यापक आत्मसमर्पण
भूपति के आत्मसमर्पण के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में भी 210 से अधिक माओवादियों ने हथियार डाल दिए हैं। यह आत्मसमर्पण अभियान माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, जो धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, नक्सल नेटवर्क अब लगभग टूट चुका है और शेष बाहरी कैडर भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस आत्मसमर्पण को विकास और विश्वास की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन नक्सलियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करेगी, क्योंकि यह क्षेत्र में शांति और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
भूपति का आत्मसमर्पण न केवल माओवादियों के बीच एक बड़ा संकेत है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की राह पर चलना ही सही है। उनके फैसले से अन्य नक्सलियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी, जो देश में शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने में मददगार होगा।
