supreme court order stray dogs: देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों और सड़कों पर घूमते पशुओं की समस्या पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अब स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थलों से सभी आवारा कुत्तों को हटाया जाए। इतना ही नहीं, कोर्ट ने ये भी निर्देश दिया कि जिन इलाकों से कुत्तों को पकड़ा जाए, उन्हें नसबंदी के बाद उसी जगह पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा। बल्कि, उन्हें स्थायी रूप से शेल्टर होम्स में रखा जाएगा।
कोर्ट ने कहा “बच्चों और मरीजों की सुरक्षा पहले”
मुख्य न्यायाधीश की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा,
“हमारा उद्देश्य किसी प्राणी के खिलाफ नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों का घूमना गंभीर खतरा पैदा करता है।”
कोर्ट ने आदेश दिया कि हर राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेश अगले तीन हफ्तों में इस आदेश के पालन की रिपोर्ट कोर्ट में जमा करें। राज्य सरकारें दो हफ्तों में उन स्कूलों और अस्पतालों की पहचान करें जहां कुत्ते और अन्य आवारा जानवर घूमते हैं। वहां बाड़ लगाई जाए ताकि जानवर परिसर में न घुस सकें।
supreme court order stray dogs: हाईवे से भी हटेंगे आवारा जानवर
कोर्ट ने सभी नेशनल और स्टेट हाईवे से भी आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया है। साथ ही, हर राज्य को एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने के लिए कहा गया है ताकि लोग सड़कों पर घूम रहे जानवरों की सूचना दे सकें। कोर्ट ने कहा कि मुख्य सचिव स्वयं जिम्मेदार होंगे कि इन निर्देशों का पालन सही ढंग से हो। अगर आदेश की अनदेखी हुई, तो अदालत कंटेम्प्ट की कार्रवाई करेगी।
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को पूरे देश में लागू किया गया
दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने तीन महीने पहले सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसी फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश दिया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जो लोग इस अभियान में बाधा डालेंगे, उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाए। अब देश के सभी राज्यों में वही नियम लागू होंगे।
कोर्ट के आदेश की 5 मुख्य बातें
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स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बस स्टैंड से आवारा कुत्ते हटाए जाएं।
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पकड़े गए कुत्तों को शेल्टर होम में रखा जाए, वापस न छोड़ा जाए।
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हाईवे पर आवारा पशुओं की सूचना के लिए हेल्पलाइन बनाई जाए।
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राज्य सरकारें 3 हफ्तों में रिपोर्ट और हलफनामा दाखिल करें।
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नगर निगम और पंचायत हर 3 महीने में स्कूल-अस्पतालों का निरीक्षण करें।
याचिकाकर्ताओं की प्रतिक्रिया “आदेश कठोर लेकिन जरूरी”
इस मामले में याचिका लगाने वाले कुछ संगठनों ने कहा कि आदेश थोड़ा कठोर जरूर है, लेकिन इसकी जरूरत थी। एक एनजीओ प्रतिनिधि ने कहा
हम पशुओं के अधिकारों के पक्ष में हैं, लेकिन बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है। कोर्ट का यह फैसला संतुलित है।
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