नई दिल्ली में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक अजीब-सी जनहित याचिका चर्चा में आ गई। मामला था प्याज और लहसुन को लेकर… और अदालत की टिप्पणी इतनी तीखी रही कि पूरा कोर्ट रूम कुछ देर के लिए ठहर सा गया। एक वकील ने अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि यह रिसर्च कराई जाए कि प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ या नेगेटिव एनर्जी होती है या नहीं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने इस पर कड़ी नाराज़गी जताई और साफ कहा कि इस तरह की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पर अनावश्यक बोझ डालती हैं।
CJI ने पूछा आधी रात को पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या?
सुनवाई के दौरान बेंच में Justice Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi शामिल थे। याचिका दायर करने वाले वकील Sachin Gupta को संबोधित करते हुए CJI ने तीखा सवाल किया
आप ये सब पिटीशन आधी रात को ड्राफ्ट करते हैं क्या?
बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की याचिकाएं अस्पष्ट हैं, और इनमें कोई ठोस आधार भी नहीं है। अदालत ने वकील की पांचों PIL को एक साथ खारिज कर दिया।
जैन समुदाय का भी आया जिक्र
प्याज-लहसुन से जुड़ी याचिका में जैन समुदाय की खान-पान परंपराओं का उल्लेख किया गया था। परंपरागत रूप से कई जैन परिवार प्याज, लहसुन और जड़ वाली सब्जियों से परहेज करते हैं।इस पर CJI ने पूछा आप जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस क्यों पहुंचाना चाहते हैं? अदालत ने संकेत दिया कि धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यताओं को लेकर इस तरह के सवाल उठाना अदालत के सामने लाने योग्य मुद्दा नहीं है।
बेंच की सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अगर याचिकाकर्ता वकील नहीं होता, तो इस तरह की फालतू याचिका पर भारी जुर्माना लगाया जाता।बेंच ने टिप्पणी की कि यह कैजुअल ड्राफ्टिंग और सुप्रीम कोर्ट का समय बर्बाद करने का उदाहरण है। साथ ही वकील को चेतावनी दी गई कि भविष्य में ऐसी याचिका दाखिल करने पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा।
वकील की बाकी चार याचिकाएं भी खारिज
सिर्फ प्याज-लहसुन वाली याचिका ही नहीं, बल्कि वकील की चार और PIL भी अदालत ने खारिज कर दीं। इनमें शामिल थे शराब और तंबाकू उत्पादों में नुकसानदायक सामग्री को नियंत्रित करने के लिए निर्देश देने की मांग। संपत्ति के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन को सुनिश्चित करने के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग। किसी भाषा को क्लासिकल भाषा घोषित करने की प्रक्रिया तय करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग। इन सभी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने बेबुनियाद और अस्पष्ट बताते हुए खारिज कर दिया।
