सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: राज्य सरकारों की इच्छा को रोका नहीं जा सकता’
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नरों और राज्यपालों के रोल पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि गवर्नर विधानसभा से पास हुए बिलों को अनिश्चितकाल तक पेंडिंग नहीं रख सकते। राज्य सरकारों की इच्छा को रोका नहीं जा सकता और लोकतंत्र को कमजोर नहीं बनाया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: गवर्नर बिलों को पेंडिंग नहीं रख सकते
चीफ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, और जस्टिस ए.एस. चंदुरकर की बेंच ने कहा: गवर्नर बिलों को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रख सकते। संविधान की धारा-200 में गवर्नर के लिए कोई संतोष (सैटिस्फैक्शन) जैसी शर्त नहीं है।
बेंच ने कहा कि गवर्नर को या तो बिल पर हस्ताक्षर करने होंगे या उसे राष्ट्रपति के पास भेजना होगा। लगातार बिलों को रोककर रखना लोकतंत्र के खिलाफ है।
पश्चिम बंगाल का तर्क: जनता की इच्छा को रोका नहीं जा सकता
पश्चिम बंगाल के वकील कपिल सिब्बल ने कहा: अगर विधानसभा से पास बिल गवर्नर को भेजा जाता है, तो उन्हें उस पर हस्ताक्षर करना ही होगा। बिलों को रोककर रखना संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा
गवर्नर मनमर्जी से बिल अटका नहीं सकते। यह लोकतंत्र को असंभव बना देगा।
हिमाचल प्रदेश का तर्क: गवर्नरों का कानून बनाने में कोई रोल नहीं
हिमाचल सरकार के वकील आनंद शर्मा ने कहा: संघीय ढांचा (फेडरलिज्म) भारत की ताकत है। अगर गवर्नर बिल रोकेंगे, तो केंद्र-राज्य संबंधों में टकराव बढ़ेगा। गवर्नर का ऑफिस जनता की इच्छा को नकारने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कर्नाटक का तर्क: राज्य में डायार्की नहीं हो सकती
कर्नाटक सरकार के वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने कहा
राज्य में दोहरी सरकार (डायार्की) की व्यवस्था नहीं हो सकती। गवर्नर को हमेशा मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि गवर्नर को केवल दो स्थितियों में विवेकाधिकार मिलता है अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजना। जब कोई बिल हाईकोर्ट की शक्तियों को प्रभावित करता है। इन दो स्थितियों को छोड़कर गवर्नर के पास कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है।
क्या अब बदलेंगे राज्यपालों के रोल?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्यपालों के रोल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब सवाल यह है कि क्या राज्यपाल अब बिलों को पेंडिंग रखने से बाज आएंगे? या फिर राज्य सरकारों और गवर्नरों के बीच टकराव और बढ़ेगा?
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