Bengal Riots SC Hints at President’s Rule? बंगाल हिंसा पर सुनवाई में उठे गंभीर सवाल
Bengal Riots SC Hints at President’s Rule? नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में वक्फ अधिनियम को लेकर हुई हिंसा और राज्य में कथित कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सोमवार को दिलचस्प और संवेदनशील घटनाक्रम देखने को मिला।
⚖️ क्या सुप्रीम कोर्ट केंद्र को राष्ट्रपति शासन लागू करने का आदेश दे सकता है?
जब अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने मामले का ज़िक्र सुप्रीम कोर्ट की पीठ के समक्ष किया, तो न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने गंभीर लहजे में कहा:
“तो क्या आप चाहते हैं कि हम केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्देश दें?”
इसके साथ ही न्यायमूर्ति गवई ने टिप्पणी की:
“हम पर पहले ही आरोप लगे हैं कि हम संसदीय और कार्यकारी कार्यों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।“
🧑⚖️ याचिका की मुख्य मांगें क्या हैं?
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संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग, ताकि राज्य में शांति व्यवस्था बहाल की जा सके।
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मुर्शिदाबाद में वक्फ अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन।
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हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में अर्धसैनिक बलों की तैनाती।
📌 अनुच्छेद 355 क्या कहता है?
अनुच्छेद 355 के अनुसार, केंद्र सरकार का यह दायित्व है कि वह:
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हर राज्य को बाहरी हमले और आंतरिक अशांति से बचाए,
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और यह सुनिश्चित करे कि राज्य सरकारें संविधान के अनुसार कार्य करें।
यह अनुच्छेद अक्सर तब चर्चा में आता है जब किसी राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हो जाए।
🔥 राजनीतिक पृष्ठभूमि भी बनी बहस का हिस्सा
हाल ही में कुछ भाजपा नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर टिप्पणी की थी, जिसमें विधायिका द्वारा पारित विधेयकों को मंजूरी देने की राज्यपालों और राष्ट्रपति के लिए एक समयसीमा तय की गई थी।
इन बयानों को लेकर न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संविधानिक संतुलन पर बहस फिर से तेज हो गई है।
📅 क्या होगा आगे?
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मामले की मुख्य सुनवाई मंगलवार को होगी।
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याचिकाकर्ता जैन ने कहा है कि वे 2022 के चुनाव के बाद हुई बंगाल हिंसा से जुड़ी लंबित याचिका पर भी सुनवाई की मांग कर रहे हैं।
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