submarine rescue: भारतीय नौसेना ने सिंगापुर में आयोजित बहुराष्ट्रीय अभ्यास XPR-25 में अपनी पनडुब्बी बचाव क्षमता का जबरदस्त प्रदर्शन किया है। इस अभ्यास में INS निस्तार और डीएसआरवी ‘टाइगर एक्स’ ने पहली बार हिंद महासागर क्षेत्र के बाहर विदेशी पनडुब्बियों के साथ सफल रेस्क्यू ड्रिल की। इस अभ्यास में 40 से अधिक देशों ने हिस्सा लिया, जिसमें शोर फेज और सी फेज शामिल थे।

पनडुब्बी के साथ सहकार्य करके रेस्क्यू अभ्यास किया
23 सितंबर को भारतीय DSRV टाइगर एक्स ने दक्षिण कोरिया की नौसेना की पनडुब्बी Shin Dol-Seok के साथ और इसके बाद सिंगापुर की पनडुब्बी RSS Invincible के साथ सफल मेटिंग की। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि पहली बार भारतीय DSRV ने विदेशी पनडुब्बी के साथ सहकार्य करके रेस्क्यू अभ्यास किया।
तत्परता और दक्षता का परिचायक
समापन के दिन 25 सितंबर को भारत, जापान और सिंगापुर की संयुक्त रेस्क्यू यूनिट्स ने मिलकर R3 रेस्क्यू ड्रिल पूरी की। इस दौरान INS निस्तार ने नेतृत्व करते हुए एक घंटे के भीतर RSS Invincible (डूबती पनडुब्बी का सिमुलेशन) के साथ सफल मेटिंग की। यह ऑपरेशन भारतीय नौसेना की तत्परता और दक्षता का परिचायक था।
submarine rescue: सक्षम सबमरीन रेस्क्यू नेटवर्क साझेदार
यह अभ्यास भारत की वैश्विक भूमिका को दर्शाता है जहां अब देश न केवल क्षेत्रीय बल्कि विश्व स्तर पर भी पनडुब्बी सुरक्षा और बचाव में महत्वपूर्व भूमिका निभा रहा है। XPR-25 भारतीय नौसेना के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने दुनियाभर के देशों को दर्शाया कि भारत एक भरोसेमंद एवं सक्षम सबमरीन रेस्क्यू नेटवर्क साझेदार है।
submarine rescue: क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है
इस कार्यक्रम में भारत की गहन स्नातकोत्तर इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी और मानवतावादी मदद के साथ-साथ नौसेना की उन्नत तकनीकी क्षमता साफ नजर आई। भारतीय नौसेना के इस अभ्यास से यह भी पता चलता है कि समुद्री सुरक्षा में सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय स्थिरता को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
वैश्विक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान
इस तरह के अभ्यास न केवल तकनीकी दक्षता बढ़ाते हैं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच विश्वास और सहयोग को भी मजबूत करते हैं, जो समुद्री सुरक्षा के लिए आवश्यक है। भारतीय नौसेना की यह उपलब्धि उसकी बहुआयामी क्षमताओं का प्रतीक है और भारत के लिए राष्ट्र सुरक्षा एवं वैश्विक सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान है…
