pediatric dialysis unit: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में किडनी रोग से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए All India Institute of Medical Sciences Bhopal में प्रदेश की पहली समर्पित बाल डायलिसिस यूनिट शुरू की गई है। इस विशेष इकाई में बच्चों के लिए हीमोडायलिसिस और अन्य जटिल किडनी उपचार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
pediatric dialysis unit: एक साल में उपचार का आंकड़ा
1000 से अधिक हीमोडायलिसिस सत्र
120 से अधिक प्लाज्मा एक्सचेंज प्रक्रियाएं
4200 से अधिक बच्चों ने ओपीडी में परामर्श और उपचार का लाभ लिया
एम्स के शिशु रोग विभाग ने न केवल अस्पताल में उपचार दिया, बल्कि अभिभावकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें घर पर भी पेरिटोनियल डायलिसिस करने में सक्षम बनाया. बाल किडनी रोग विशेषज्ञ Girish Chandra Bhatt के अनुसार, अब तक 10 से अधिक अभिभावकों को घर पर डायलिसिस करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ‘वृक्कांकित 2.0’ से आसान देखभाल के लिए एम्स ने ‘वृक्कांकित 2.0’ नामक विशेष हेल्थ रिकॉर्ड पुस्तिका शुरू की है। यह पुस्तिका बच्चों के मेडिकल इतिहास को व्यवस्थित रखेगी उपचार की निरंतर निगरानी में मदद करेगी शिशु रोग विभाग की प्रमुख Shikha Malik ने बताया कि सही देखभाल और सकारात्मक दृष्टिकोण से किडनी रोग से पीड़ित बच्चे भी सामान्य जीवन जी सकते हैं।
pediatric dialysis unit: डीएम पाठ्यक्रम और फेलोशिप कार्यक्रम
एम्स भोपाल में बाल किडनी रोग विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए डीएम पाठ्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप कार्यक्रम भी शुरू किए गए हैं.इससे प्रदेश और देश में बच्चों के किडनी रोग उपचार में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे।
रेडियो आयोडीन से थायराइड कैंसर का इलाज
एम्स भोपाल के न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग में अब रेडियो आयोडीन ट्रीटमेंट की सुविधा भी उपलब्ध है।थायराइड कैंसर के लगभग 90% मामलों में प्रभावी,मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा.
