
RSS के बनने के पीछे की कहानी
आज RSS को 100 साल पूरे हो चुके है। लेकिन क्या आप जानते है की RSS के बनने के पीछे की कहानी क्या है। साल 1907..जब बंगाल में आजादी के संघर्ष के लिए क्रांतिकारियों ने अनुशिलन समिति के नाम से एक क्रांतिकारी संघठन खड़ा किया। नागपुर से डॉक्टर की पढ़ाई करने आए केशवराम बलराम हेडगेवार भी इस संघठन का हिस्सा बने। इसके बाद कांग्रेस Join कर ली। लेकिन कांग्रेस का खिलाफत मुवमेंट को सपोर्ट करना हेडगेवार का पसंद नहीं आया। उन्होंने इसे मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति माना।

कैसे पड़ा RSS नाम?
उन्होंने ठान लिया था की वो एक ऐसी संस्था बनाएंगे जो हिंदूओं के लिए काम करें। बलराम हेडगेवार ने RSS की शुरूआत अपने घर से की, शुरूआत में उनको सुनने के लिए केवल 12 लोग ही आए। कुछ लोग और जुड़े फिर तो बात सामने आई की संघठन का नाम तो होना चाहिए। काफी चर्चा के बाद तीन नामों को छांटकर निकाला गया, उनको लेकर वोटिंग हुई. जिनमें पहला नाम ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ था, दूसरा था ‘जरी पटका मंडल’ और तीसर… था ‘भारतोद्धार मंडल’. इसमें 20 वोटों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नाम बहुमत से चुना गया.
RSS 100 Years: शाखा की शुरूआत
धीरे-धीरे संघ से लोग जुड़ते गए…इसके बाद डॉक्टर हेडगेवार ने खुद शाखा लगाना शुरू किया। इसमें योग, सूर्य नमस्कार, लाठी ट्रेनिंग के साथ-साथ Intellectual Training दी जाने लगी। कुछ ही समय में साखा में आने वालों की संख्या कई गुना बढ़ गई। अब समय आ गया था जब डॉक्टर हेडगेवार ने संघ को Official रूप देने का सोचा। इसके बाद 27 सितंबर 1925 के दिन नागपुर में विजयदशमी के दिन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की बुनियाद रखी गई।

RSS के 55 संघठन
RSS 100 Years: ये ऐसा संघठन था जिसे बनाया तो समाज के लिए लेकिन आगे जाकर ये राजनीति का वो गोल चक्कर बना की इसके अगल बगल राजनीति से जुड़ी चर्चाएं होने लगी। आज RSS के करीब 55 Organization है। जैसे भारतीय जनता पार्टी, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद, हिंदू जागरण मंच, विद्या भारती, सरस्वती शिशु मंदिर..जो पूरे देश में फैले हुए है।
